• search
राजस्थान न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

इस मंदिर में होती है दूल्हा-दुल्हन की पूजा, भगवान की कोई प्रतिमा नहीं, जानिए क्यों?

By राजेश सोनी
|

Banswara News in Hindi, बांसवाड़ा। देश में मंदिरों का इतिहास भी खासा रोचक है। इस मामले में राजस्थान का यह मंदिर सबसे अनूठा है, क्योंकि इस मंदिर में किसी भगवान नहीं बल्कि दूल्हा-दुल्हन की पूजा की जाती है। बात भले ही गले नहीं उतर रहो हो, मगर दूल्हा-दुल्हन का यह मंदिर देखना है तो राजस्थान के बांसवाड़ा-उदयपुर हाईवे पर सफर कीजिए।

जमीन से निकला खजाना, लोगों में मची चांदी के सिक्के लूटने की होड़

Bride Groom Temple in Lasada Village on Banswara Udaipur Highway

इस हाईवे पर बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर गांव लसाड़ा के तालाब के पास ( Dulha Dulhan Temple in Banswara) दूल्हा-दुल्हन का मंदिर बना हुआ है, जिसमें किसी देवी-देवता की बजाय दूल्हा-दुल्हन की प्रतिभा भी लगी हुई। लोगों की इस मंदिर में गहरी आस्था है। खासकर बारातियों की। जब भी कोई बारात लसाड़ा गांव में इस हाईवे से गुजरती है। बाराती दूल्हा-दुल्हन के मंदिर के दर्शन जरूर करते हैं।

मंदिर बनने की स्टोरी 40 साल पुरानी

बांसवाड़ा में बने दूल्हा-दुल्हन के इस मंदिर के निर्माण की कहानी 40 साल पुरानी है। लसाड़ा के ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1979 में नजदीकी गांव भीमगढ़ गांव में डूंगरपुर जिले के लीमड़ी (आसपुर तहसील) से एक बारात आई थी। शादी धूमधाम से हुई थी। विदाई के बाद 22 वर्षीय दूल्हा मोतीसिंह और भीमगढ़ निवासी 20 वर्षीय दुल्हन सुशीला कंवर बस में सवार होकर रवाना हो गए। लसाड़ा तालाब की पाल पर गुजरते समय बस का एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें दूल्हा-दुल्हन की मौत हो गई। इस घटना ने सबको झकझोर दिया था।

Bride Groom Temple in Lasada Village on Banswara Udaipur Highway

लोग कभी इस जगह को नहीं भूल पा रहे थे। दूल्हा-दुल्हन की बस के बाद भी यहां कई एक्सीडेंट हुए। ऐसे में लोगों को लगा कि यह जगह अपशुकनी हो गई। यहां पर पूजा पाठ होना चाहिए ताकि एक्सीडेंट रुक सकें। किसी भगवान की बजाय लोगों दूल्हा-दुल्हन की ही पूजा शुरू कर दी है। नतीजा यह रहा कि इसके बाद दुर्घटनाएं होना कम हो गई। ऐसे में लोगों की आस्था बढ़ती गई और वर्ष 2005 में यहां मंदिर बनाकर उसमें दूल्हा-दुल्हन की प्रतिमा स्थापित कर दी गई, जो वर्तमान में भी है।

शादी में विघ्न दूर होने की मांगते हैं मन्नत

बांसवाड़ा के इस दूल्हा-दुल्हन मंदिर में स्थानीय लोगों के साथ वाहन चालकों की भी आस्था है। खासकर बारात लेकर जाने वाले वाहन चालकों की। गांव भीमगढ़ के शंकर लाल चौहान की मानें तो लसाड़ा के तालाब की पाल से जब बारात गुजरती है तो बाराती दूल्हा-दुल्हन के मंदिर में रुककर शादी बिना​ किसी व्यवधान के सम्पन्न होने की मन्नत मांगते हैं। इसके अलावा अविवाहित युवक-युवतियों की सगाई या शादी में किसी प्रकार की दिक्कत आने पर वे भी यहां धोक लगाने आते हैं।

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Bride Groom Temple in Lasada Village on Banswara Udaipur Highway
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more