'बहुत उछल-कूद कर रहा है, गोली मार दूंगा', किसने दी BJP प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को जान से मारने की धमकी?

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को जान से मारने की धमकी मिली है। शुक्रवार सुबह एक कॉलर ने उन्हें गाली-गलौज करते हुए गोली मारने की धमकी दी। कॉलर ने राज्यसभा में राठौड़ के कामकाज पर सवाल उठाए। राठौड़ ने इस घटना को लेकर दिल्ली के संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

कॉल ट्रेस करने पर पुलिस को पता चला कि सिम कार्ड अनूपगढ़ के एक व्यक्ति के नाम से रजिस्टर्ड है। धमकी देने वाले व्यक्ति को उसी दिन दोपहर बाद हिरासत में ले लिया गया। इस घटना के बाद, सीएम भजनलाल शर्मा और राधामोहन दास अग्रवाल सहित कई भाजपा नेताओं ने राठौड़ से संपर्क कर अपनी चिंता व्यक्त की।

Madan Singh Rathore

जांच और हिरासत

अनूपगढ़ एसपी रमेश मोरया ने पुष्टि की कि हेतराम को धमकी देने के लिए हिरासत में लिया गया है। इस्तेमाल किया गया सिम कार्ड उसके बेटे के नाम पर पंजीकृत था। शुरुआती पूछताछ में पता चला कि हेतराम ने धमकी देने की बात स्वीकार की है, लेकिन उसने इसका मकसद नहीं बताया। ऐसा प्रतीत होता है कि हेतराम अक्सर विभिन्न अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराता रहता है और उसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

जब राठौड़ के कर्मचारियों ने फिर से संपर्क किया, तो हेतराम ने पहले दावा किया कि वह बिहार से है, फिर उसने कहा कि वह अनूपगढ़ से कॉल कर रहा है। उसके बाद उससे संपर्क करने के कई प्रयासों के बावजूद, उसने आगे कोई कॉल नहीं उठाया।

घटना के जवाब में मदन राठौड़ ने इस बात पर असमंजस व्यक्त किया कि कोई उन्हें क्यों धमका सकता है। उन्होंने कहा कि अपमानित होने के बावजूद उन्होंने फोन करने वाले से विनम्रता से बात की। राठौड़ ने मीडिया से कहा, "मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है कि कोई मुझे धमकाए।"

राठौड़ ने अजमेर दरगाह शरीफ में शिव मंदिर के बारे में एक याचिका से संबंधित एक अलग मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने लोगों से इतिहास का अध्ययन करने और ऐसे मामलों पर अदालती फैसले का इंतजार करते समय सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का आग्रह किया।

राजस्थान में राजनीतिक हस्तियों को धमकियों का यह कोई अकेला मामला नहीं है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को इस साल दो बार ऐसी ही धमकियां मिली थीं, एक बार जनवरी में और दूसरी बार जुलाई में। दोनों ही मामलों में जयपुर और दौसा की जेलों से कॉल की गई थीं।

अजमेर दरगाह मामले को लेकर चल रहे विवाद ने पूरे भारत में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कई भाजपा नेताओं ने मुगल शासन के दौरान हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किए जाने के दावों का समर्थन किया है।

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