राजस्थान में BSF की बड़ी पहल, 28 साल बाद किसानों के लिए खुलेगा भारत-पाक बॉर्डर, जारी होंगे पास

बाड़मेर, 5 जुलाई। बीएसएफ की पहल से 28 साल बाद बॉर्डर तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच फंसी हजारों किसानों की लाखों बीघा जमीन पर अब किसान फिर से खेती कर सकेंगे। साल 1992 में शुरू हुई तारबंदी के बाद किसानों की जमीन जीरो पॉइंट और तारबंदी के बीच चली गई।

Indo-Pak border will open for farmers after 28 years

अब बीएसएफ ने किसानों को उनकी खातेदारी जमीन पर खेती के लिए छूट दे दी है। इसके लिए नए गेट भी बनाए है। बॉर्डर तारबंदी पर लगे गेट अब खुलेंगे और किसान अपने बीएसएफ की ओर से जारी आईडी कार्ड दिखाकर खेती के लिए जा सकेंगे। सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण इस इलाके में खेती के लिए जाने और वापिस आने वाले किसानों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। किसान दिन के समय ही खेती के लिए जा सकेंगे। रात के समय खेती नहीं करने दी जाएगी।

Indo-Pak border will open for farmers after 28 years

पंजाब की तर्ज पर अब चौहटन के जाटों का बेरा, सारला इलाके में किसानों को खेती करने के लिए गेट खोलने की छूट दी है। बताया जा रहा है कि साल 1992 में भारत ने अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर 100 मीटर अंदर तारबंदी की थी, लेकिन किसानों को महज तारबंदी के नीचे आई 4 मीटर जमीन का मुआवजा मिला था। बाकी जमीन 28 साल से किसानों की खातेदारी में दर्ज है, लेकिन किसान यहां खेती के लिए नहीं जा सकते थे, लेकिन अब बीएसएफ ने इन किसानों को खेती करने की छूट दे दी है।

जिन किसानों के बॉर्डर तारबंदी से पहले ट्यूबवैल हैं और वे जमीन पर सिंचाई करना चाहता है तो वो खेती के लिए पाइपलाइन ले जा सकेंगे। किसान जमीन के चारों ओर 4 फीट तक जाली कर सकेंगे, ताकि फसल को नुकसान नहीं हो। जिन किसानों की जमीन तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच आती है। उन किसानों को बीएसएफ पास जारी करेगा।

Indo-Pak border will open for farmers after 28 years

इसके लिए किसानों को अपनी जमाबंदी और फोटो आईडी के साथ बीएसएफ के संबंधित चौकियों पर आवेदन करना होगा। बीएसएफ जांच पड़ताल के बाद फोटो आईडीयुक्त पास जारी करेगा। बताजा जा रहा है कि भारत पाक बॉर्डर पर तारबंदी और जीरो लाइन के बीच करीब 11 हजार 468 बीघा जमीन फंसी हुई है। 28 साल से इस जमीन का न तो मुआवजा मिला है, न ही किसान इस जमीन पर खेती कर पाए हैं जबकि सरकारी रिकॉर्ड में ये जमीन किसानों की खातेदारी है।

15 जून 2020 को गृह मंत्रालय ने एक आदेश दिया कि तारबंदी के गेट नं. 97 और 98 के बीच एक नया गेट बनाया जाये। अब गेट तैयार कर दिया है। गृह मंत्रालय के सीमा प्रबंधन प्रभाग ने 27 सितंबर 2019 को कहा था कि जमीन पर किसानों का ही हक है। लिहाजा अब बीएसएफ की पहल पर इस जमीन पर किसान खेती कर सकेंगे।

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