निकम्मा से निवास तक: अशोक गहलोत-सचिन पायलट की मुलाकात, रिश्तों में आई नरमी या रणनीति का हिस्सा? VIDEO
Ashok Gehlot Sachin Pilot: सोशल मीडिया पर आज राजस्थान कांग्रेस टॉप ट्रेंड में शामिल है। इसकी वजह है-राज्य के दो बड़े नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच 'सियासी रिश्तों में नरमी' के संकेत। दोनों की हालिया मुलाकात का वीडियो वायरल हो रहा है। यह लंबे अरसे बाद ऐसा मौका है जब दोनों नेता सार्वजनिक रूप से एक साथ नजर आए हैं।
गहलोत ने खुद किया वीडियो साझा, पायलट का किया ज़िक्र
अशोक गहलोत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा-AICC महासचिव श्री @sachinpilot ने आवास पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. श्री राजेश पायलट की 25वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया। मैं और राजेश पायलट जी 1980 में पहली बार एक साथ ही लोकसभा पहुंचे एवं लगभग 18 साल तक साथ में सांसद रहे। उनके आकस्मिक निधन का दुख हमें आज भी बना हुआ है। उनके जाने से पार्टी को भी गहरा आघात लगा।

यह भी पढ़ें- Sachin Pilot को क्रश बताने वालीं Sarpanch नैना झोरड़ का दूसरा Video वायरल, बोलीं-'उनका तलाक हो चुका मेरा नहीं'
वहीं,पायलट ने दोनों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा-'आज पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot जी से मुलाकात की। मेरे पिता स्व. राजेश पायलट जी की 25वीं पुण्यतिथि पर 11 जून को दौसा में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में उन्हें शामिल होने के लिए निवेदन किया।'

गहलोत-पायलट की मुलाकात पर जनता और मीडिया में उत्सुकता
दोनों नेताओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। यही कारण है कि अशोक गहलोत, सचिन पायलट और राजेश पायलट 'एक्स' (पूर्व ट्विटर) पर टॉप ट्रेंड कर रहे हैं। राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को कांग्रेस के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।
इतिहास में पहली बार: पायलट पहुंचे गहलोत के सरकारी आवास
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संभवतः यह पहली बार हुआ है जब सचिन पायलट, अशोक गहलोत के सरकारी आवास पहुंचे हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद से दोनों नेताओं के संबंधों में तनाव बना हुआ था।
राजेश पायलट की विरासत, और सचिन पायलट का राजनीतिक सफर
राजेश पायलट और अशोक गहलोत 1980 में एक साथ लोकसभा पहुंचे थे। 2000 में सड़क हादसे में राजेश पायलट का निधन हुआ। इसके बाद सचिन पायलट ने पिता की विरासत संभाली और कांग्रेस में एक मजबूत युवा चेहरा बने।

2018 में मिली जीत, लेकिन शुरू हुई खींचतान
विधानसभा चुनाव 2018 में सचिन पायलट को पीसीसी चीफ बनाया गया था। उन्होंने चुनाव जीत में बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन मुख्यमंत्री पद अशोक गहलोत को मिला और पायलट को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद से दोनों के रिश्तों में तनाव शुरू हो गया।
2020 की बगावत और सरकार पर संकट
साल 2020 में सचिन पायलट अपने समर्थक 19 विधायकों के साथ मानेसर चले गए। इससे अशोक गहलोत की सरकार संकट में आ गई थी। हालांकि गहलोत ने अपनी सरकार बचा ली, लेकिन पायलट को पीसीसी और उपमुख्यमंत्री पद गंवाना पड़ा।

'निकम्मा' तक पहुंचा विवाद
दोनों के बीच संबंध इतने बिगड़ गए कि वे पार्टी मंचों पर भी एक-दूसरे के साथ नजर नहीं आते थे। अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को 'निकम्मा-नकारा' तक कह दिया था। इसी खींचतान के चलते 2023 के चुनाव में कांग्रेस सत्ता गंवा बैठी।
बिना राहुल गांधी के साथ दिखे दोनों नेता, हैरान हैं सब
राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर बिना किसी मध्यस्थता के दोनों नेताओं का साथ आना हर किसी को आश्चर्यचकित कर रहा है। आमतौर पर गहलोत गुट इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखता था, लेकिन इस बार परंपरा टूटती दिख रही है।

राजस्थान कांग्रेस के लिए शुभ संकेत?
अगर यह मेलजोल आगे भी जारी रहता है, तो यह राजस्थान कांग्रेस के लिए एक सकारात्मक मोड़ हो सकता है। पार्टी में गुटबाज़ी खत्म करने और एकजुटता लाने की दिशा में यह पहला मजबूत कदम माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें- Sachin Pilot: इस महिला सरपंच के क्रश हैं तलाकशुदा सचिन पायलट, नैना झोरड़ ने इंटरव्यू में खोले दिल के सारे राज












Click it and Unblock the Notifications