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गहलोत सरकार का जातिगत सर्वेक्षण प्लान डिकोड! कांग्रेस की राष्ट्रीय रणनीति या फिर कुछ और? जानिए बड़े दावे

Caste Census: कुल 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके बाद अगले साल यानी 2024 में लोकसभा चुनाव। ऐसे में बिहार की महागठबंधन सरकार की ओर से जातिगत जनगणना के ऐलान के बाद राजस्थान में भी बड़ी घोषणा की गई। गहलोत सरकार राज्य में जातिगत सर्वेक्षण कराने के लिए आदेश जारी किया है। चुनाव साल में कांग्रेस का इसे मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या राजस्थान में मुख्यमंत्री गहलोत का जाति सर्वेक्षण का कदम सिर्फ राजस्थान तक ही सीमित रहेगा या फिर कांग्रेस इसे आगामी लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर पेश करेगी।

बिहार की महागठबंधन सरकार के नक्शे कदम पर आगे बढ़ते हुए राजस्थान सरकार ने पिछले हफ्ते जातिगत सर्वेक्षण का आदेश जारी कर दिया। सीएम गहलोत के इस कदम के बाद सियासी गलियारों में जातिवाद की राजनीति को लेकर चर्चा का दौर तेज गया। हालांकि गहलोत सरकार ने अपने निर्णय आरक्षण और सामाजित उत्थान से जुड़ा हुआ बताया।

Rajasthan Caste Survey

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखे एक पोस्ट में जातिगत सर्वेक्षण को सामाजिक न्याय के लिए नया अध्याय बताया। उन्होंने केंद्र की एनडीए सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा, "वंचितों की विरोधी केंद्र सरकार जाति जनगणना से लगातार कतरा रही है, जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा अवरुद्ध हो रही है। ऐसे में राज्य सरकार ने हर जरूरतमंद को उनके अधिकार का लाभ दिलाने के लिए अपने संसाधनों का उपयोग करके जाति आधारित सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया है। सर्वे का डेटा एकत्र किया जाएगा और इसके आधार पर अलग-अलग वर्गों की आवश्यकताओ को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जा सकेंगी।"

सीएम गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने एक दशक में होने वाली जनगणना के साथ-साथ सामाजिक व आर्थिक स्तर को उजागर करने के लिए जातिगत सर्वे का भी संकल्प लिया है। सीएम गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी के सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण को क्रियान्वित करन के लिए पिछड़े वर्गों की स्थिति का आकलन करना बहुत जरूरी है। यह ऐतिहासिक कदम सामाजिक न्याय के दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय साबित होगा।

बीजेपी के हिंदुत्व के मुकाबले बड़ा दांव
दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस सरकार की ओर से जातिगत सर्वेक्षण सामाजिक न्याय को हिंदुत्व खिलाफ खड़ा करने और भाजपा के ओबीसी वोटों को नुकासान पहुंचाने का प्रयास है। सीएम गहलोत ये बड़ा पांसा फेंका है, जिसके बाद जिससे भाजपा के हिंदुत्व के मुद्दे या कमंडल का मुकाबला करने के लिए मंडल राजनीति के लिए मंच तैयार हो गया है।

तीन दशक पुराना पैटर्न तोड़ने का प्रयास
राजस्थान में पिछले तीन दशक से एक ही पैटर्न चल रहा है। यहां विधानसभा चुनाव में एक बार कांग्रेस तो दूसरी बार बीजेपी को विजय हासिल होती है। लेकिन इस बार पुराने ट्रेंड को तोड़ने के लिए कांग्रेस एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।

आईएनडीआईए ने बनाया मुद्दा
बिहार और राजस्थान सरकार के निर्णय के बाद अब गठबंधन आईएडीआईए ने अब इसे प्रमुख मुद्दा बना लिया है। दरअसल, गहलोत मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद राजस्थान के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने शनिवार को निर्णय का अनुपालन करते हुए जातिगत सर्वेक्षण का आदेश जारी कर दिया।

कैसे होगा जातिगत सर्वेक्षण
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के आदेश में कहा गया है कि योजना विभाग इसके लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। जिला कलेक्टर नोडल अधिकारी होंगे और नगर निगमों, परिषदों, गांवों और पंचायतों के स्तर पर इसके लिए विभिन्न स्तर पर कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे।

राजस्थान में दावा किया जा रहा है कि 1931 में पिछली जाति जनगणना के बाद से कुल जनसंख्या में उनका हिस्सा बढ़ा है। अब जातियों की ओर से राजनीतिक और आर्थिक प्रतिनिधित्व के आनुपातिक आंकड़े सामने लाने की बात हो रही है। राजस्थान में जाट और राजपूत दोनों प्रतिद्वंद्वी जातिवर्ग हैं। दोनों का दावा है कि राज्य की कुल जनसंख्या में वे 10% से भी अधिक हैं, जबकि कुछ जाट नेता इसे 20% से भी अधिक मानते हैं।

राजस्थान में जातिगत सर्वेक्षण का असर
राजस्थान अधिकांश जातियों के अपने सामाजिक समूह हैं। राजपूत, जाट, ब्राह्मण, बनिया, गुज्जर और माली जैसे सभी प्रमुख समुदाय कई बार अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। राजस्थान में सामाजिक संगठन अपनी मांगों के लिए महापंचायतें आयोजित करते हैं। 2008 के गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान, समुदाय के मौजूदा भाजपा विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ चले गए। राजपूत पारंपरिक रूप से भाजपा के मतदाता हैं। लेकिन उन्होंने गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर पर बीजेपी के खिलाफ मतदान किया था।

वहीं जाट पारंपरिक रूप से कांग्रेस के मतदाता रहे हैं। पार्टी को 150 से अधिक सीटें जीतने में जाट समुदाय मदद करता रहा। लेकिन जब जाट राजनेता परसराम मदेरणा को सीएम बनाए जाने की उम्मीद टूटी तो ये भाजपा के पाले में आ गया। जाट समुदाय के भाजपा को सपोर्ट करने का एक और कारण था, क्योंकि अक्टूबर 1999 में तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जाट समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का दर्जा दिया गया था।

वहीं अब गहलोत सरकार ने राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले एक कदम आगे बढ़ाया है। दावा किया जा रहा है कि अगर राजस्थान के जाति सर्वेक्षण के नतीजे बिहार के समान निकलते हैं, जो संयुक्त पिछड़ा वर्ग आबादी का 63% है, तो इससे कांग्रेस को फायदा होने की संभावना है और जाटों के मामले में उसे फिर से बढ़त हासिल करने में मदद मिलेगी।

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