राजस्थान सरकार गिराने का षड्यंत्र किन 3 भाजपा नेताओं ने रचा? पूर्व सीएम गहलोत ने गिना दिए नाम
राजस्थान की राजनीति एक बार फिर तीखी बयानबाजी और पुराने आरोपों के दौर में पहुंच गई है। जोधपुर में मीडिया से मुखातिब हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर उनकी सरकार गिराने की कोशिशों का आरोप दोहराया-लेकिन इस बार नाम लेकर।
गहलोत ने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत पर 'षड्यंत्र रचने' का आरोप लगाते हुए कहा कि "मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की तरह राजस्थान में भी सरकार गिराने की कोशिश की गई थी, लेकिन हम डटकर खड़े रहे और लोकतंत्र को बचा लिया।"

'हॉर्स ट्रेडिंग' का आरोप, सबूत होने का दावा
गहलोत यहीं नहीं रुके। उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश की गई थी, और उनके पास इसके पक्के सबूत मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि "जब बीजेपी संविधान दिवस मना रही है, तो क्या ऐसी गतिविधियां संविधान का सम्मान हैं?"
उन्होंने इमरजेंसी काल की भी चर्चा की और कहा कि कांग्रेस ने उस दौर की गलतियों के लिए माफी मांगी थी। "लेकिन आज जो हो रहा है, वह अघोषित आपातकाल जैसा है-जहां पत्रकार, लेखक और एक्टिविस्ट जेल भेजे जा रहे हैं," उन्होंने कहा।
भजनलाल सरकार पर भी निशाना, प्रशासनिक तंत्र को बताया कमजोर
राजस्थान की मौजूदा भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रशासनिक पकड़ पर सवाल खड़े किए। "जनता त्रस्त है, अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। विधायक तक की कोई सुनवाई नहीं हो रही। जयपुर में दरवाजे बंद हैं-ना मंत्री मिलते हैं, ना मुख्यमंत्री।"
गहलोत के मुताबिक अफसरशाही पर मुख्यमंत्री की पकड़ नहीं है और जमीनी स्तर पर कामकाज ठप है। उन्होंने दावा किया कि अधिकारी तक अब विधायकों को चुनौती दे रहे हैं-जो पहले कभी नहीं होता था।
बीजेपी की पलटवार: 'गहलोत भूल गए अपनी सरकार का अंत?'
गहलोत के इस आक्रामक तेवर के बाद बीजेपी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है। नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने गहलोत के आरोपों को "बेहद बचकाना और झूठा" बताया। उन्होंने कहा, "गहलोत की सरकार खुद दो फाड़ में बंटी हुई थी, उनके ही विधायक उनसे नाराज़ थे।"
वहीं, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने तंज कसते हुए कहा कि "जो खुद विधायकों को होटल में बंद करके रखते थे, वो आज लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं?" मंत्री सुमित गोदारा ने तो गहलोत की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोरोना काल में वे बीस महीने तक मुख्यमंत्री निवास से बाहर तक नहीं निकले।
बयानबाजी या आने वाले चुनावों की तैयारी?
गहलोत के इस ताज़ा बयान को केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया मानना शायद जल्दबाज़ी होगी। यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब राज्य और देश की राजनीति में विपक्षी एकता, केंद्र-राज्य संबंध और संविधानिक मूल्यों पर बहस एक बार फिर गर्म है। साथ ही, इन बयानों के जरिए गहलोत अपनी कांग्रेस पार्टी में भी प्रासंगिकता बनाए रखना चाह रहे हैं। राजस्थान की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच यह खींचतान आगे भी और तीखी होने की संभावना है-खासतौर से तब, जब 2024 के लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद राजनीतिक समीकरणों की पुनर्रचना हो रही है।












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