'अब नहीं देनी कोई परीक्षा', NEET UG पेपर लीक होने पर स्टूडेंट ने दे दी जान, सुसाइड नोट उठा रही सिस्टम पर सवाल
NEET UG परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद रद होने से देशभर में लाखों छात्र असमंजस और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता जाहिर की है, क्योंकि लंबे समय की तैयारी के बाद अचानक परीक्षा रद होने से उनके भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी बीच गोवा के कर्टोरिम से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां 17 साल के एक छात्र ने अपने घर में आत्महत्या कर ली।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, छात्र परीक्षा रद होने के बाद काफी तनाव में था और लगातार परेशान चल रहा था। आत्महत्या से पहले उसने एक नोट भी छोड़ा, जिसमें लिखा था कि वह अब किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहता। इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घर में मिला शव
यह छात्र मार्गो के एक हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ता था। बुधवार को उसने घर के अंदर फंदा लगाकर जान दे दी। उसके पिता, जो रेलवे में गार्ड हैं, जब ड्यूटी से घर लौटे तो उन्होंने बेटे का शव देखा। घटना के समय उसकी मां और बहन अपने पैतृक गांव गई हुई थीं।
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सुसाइड नोट में क्या लिखा
पुलिस को मौके से एक नोट मिला है। इसमें छात्र ने लिखा कि वह अब किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का हिस्सा नहीं बनना चाहता। माना जा रहा है कि परीक्षा और भविष्य को लेकर वह काफी तनाव में था।
जानकारी के अनुसार, परिवार मूल रूप से बेंगलुरु का रहने वाला है और फिलहाल गोवा के कर्टोरिम इलाके में रह रहा था। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। मैना-कर्टोरिम पुलिस स्टेशन ने मामले को अप्राकृतिक मौत के तौर पर दर्ज किया है। शव को दक्षिण गोवा जिला अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया है। पुलिस इंस्पेक्टर कपिल नाइक ने कहा कि मामले की आगे जांच की जा रही है।
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?
इस बारे में हमने डॉ समीर जो की एक मनोचिकित्सक हैं, उनसे बात करने की कोशिश की। डॉक्टर का कहना है कि NEET-UG जैसी उच्च प्रतिस्पर्धी परीक्षा का रद्द होना छात्रों की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकता है। एक मनोचिकित्सक (Psychiatrist) के अनुसार, छात्र लंबे समय तक अपनी पढ़ाई, दिनचर्या और भविष्य को इस परीक्षा से जोड़कर देखते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने पर भावनात्मक झटका (Emotional Shock), निराशा, गुस्सा और असहायता जैसी भावनाएं पैदा हो सकती हैं।
इस स्थिति से बेचैनी और तनाव (Anxiety) के साथ भविष्य को लेकर अनिश्चितता (Uncertainty) भी बढ़ सकती है। कई छात्रों को दोबारा परीक्षा और प्रदर्शन को लेकर लगातार मानसिक दबाव महसूस होने लगता है। इससे नींद की समस्या, ध्यान केंद्रित करने में कमी (Concentration Issues), मानसिक थकान और भावनात्मक टूटन (Emotional Breakdown) जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
मनोचिकित्सकों का मानना है कि ऐसी घटनाएं कई छात्रों में व्यवस्था पर भरोसा टूटने (Trust Breakdown) की भावना पैदा करती हैं। परिवार की अपेक्षाएं, कोचिंग का दबाव और दूसरों से तुलना करने की प्रवृत्ति इस तनाव को और बढ़ा सकती है। अगर कोई छात्र पहले से मानसिक तनाव, अवसाद (Depression) या लगातार थकान और दबाव की स्थिति (Burnout) से जूझ रहा हो, तो स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है।
कुछ मामलों में लगातार निराशा और भावनात्मक दबाव खुद को नुकसान पहुंचाने (Self-Harm) या आत्महत्या से जुड़े विचारों (Suicidal Thoughts) तक ले जा सकता है। हालांकि ऐसा कदम केवल परीक्षा रद्द होने से नहीं, बल्कि कई मानसिक और भावनात्मक कारणों के एक साथ बढ़ने से होता है।
ऐसी स्थिति में लगातार उदासी, लोगों से दूरी बनाना, "अब कुछ नहीं बचा" जैसी बातें करना, या खुद को नुकसान पहुंचाने से जुड़े संकेतों को गंभीरता से लेना जरूरी माना जाता है। जरूरत पड़ने पर पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य सहायता (Professional Mental Health Support) लेना महत्वपूर्ण हो सकता है।
अगर आप या आपके आसपास कोई ऐसी समस्या से जूझ रहा हो तो तुरंत इस नंबर पर संपर्क करें-
Tele-MANAS Helpline: 14416 or 1-800-891-4416
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