77 वर्षीय हुकुमदास 10वीं में 56 बार फेल हुआ, अब 57वीं बार में पास होकर भरा 12वीं का फॉर्म

पोतों ने कॉलेज कर लिया, 77 वर्षीय दादा दे रहा 12वीं की परीक्षा, दसवीं में ही 56 बार हुआ फेल

जालोर, 13 जनवरी। ये हैं हुकुमदास वैष्‍णव। राजस्‍थान के जालोर जिले के गांव सरदारगढ़ के रहने वाले हैं। इनके नाम गजब का रिकॉर्ड है। वो यह है क‍ि हुकुमदास 77 साल की उम्र में पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। यहीं नहीं बल्कि बीते साठ साल से बोर्ड परीक्षाएं भी दे रहे हैं।

पढ़ाई को लेकर हुकुमदास में गजब का जुनून

पढ़ाई को लेकर हुकुमदास में गजब का जुनून

पढ़ाई को लेकर हुकुमदास में गजब का जुनून है। यह बात अलग है कि इन्‍हें दसवीं कक्षा पास करने में ही पांच दशक से ज्‍यादा का वक्‍त लग गया। दसवीं में 56 बार फेल होने के बाद साल 2019 में 57वीं बार में पास हो गए।

 पोते भी स्कूलिंग पूरी कर चुके

पोते भी स्कूलिंग पूरी कर चुके

57वीं बार में दसवीं पास करके अब मंगलवार को जालोर शहर के स्टेट ओपन के संदर्भ केंद्र राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शहरी में 12वीं कला वर्ग से आवेदन किया है। मजे की बात यह है कि अब तो उनके पोते भी स्कूलिंग पूरी कर चुके हैं।

1945 में जन्मे हुकुमदास

1945 में जन्मे हुकुमदास

बता दें कि जालोर जिले के गांव सरदारगढ़ में 1945 में जन्मे हुकुमदास ने कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई गांव तीखी से की। मोकलसर में 1962 में पहली बार दसवीं की परीक्षा दी। बाड़मेर में परीक्षा केंद्र था। पहली परीक्षा में पूरक आए दूसरी बार परीक्षा देने पर फेल हो गए। दोस्तों ने चैलेंज दिया कि तू दसवीं पास नहीं हो सकता। इस पर हुकुमदास ने कसम खा ली कि अब दसवीं पास करके दिखाऊंगा।

 2019 में स्टेट ओपन से द्वितीय श्रेणी से 10वीं क्लास पास की

2019 में स्टेट ओपन से द्वितीय श्रेणी से 10वीं क्लास पास की

मीडिया से बातचीत में हुकुमदास ने कहा कि वे दसवीं कक्षा में 56 बार फेल हो चुके हैं, मगर कभी हार नहीं मानी। 2019 में स्टेट ओपन से द्वितीय श्रेणी से 10वीं क्लास पास की। पहली बार यह परीक्षा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से 1962 में दी। फिर आठवीं पास के आधार पर भू-जल विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद पर नौकरी लग गई थी।

नियमित पढ़ाई छोड़कर स्वयंपाठी बने

नियमित पढ़ाई छोड़कर स्वयंपाठी बने

फिर नियमित पढ़ाई छोड़कर स्वयंपाठी के रूप में परीक्षाएं देनी शुरू कर दिया। 2005 में कोषालय विभाग से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद से रिटायर हुए। 2010 तक माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से 48 बार परीक्षा स्वयंपाठी के तौर पर दी। उसके बाद स्टेट ओपन से ट्राई किया। आखिरकार 2019 में स्टेट ओपन से द्वितीय श्रेणी से 10वीं पास की। अब 2021-22 से कक्षा 12वीं में प्रवेश लिया है।

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