पुलिस थाने में बंधी भैंस पर 2 परिवारों ने जताया मालिकाना हक, जानिए फिर कैसे पता चला असली मालिक का?
दौसा, 13 सितम्बर। राजस्थान के दौसा जिले के बांदीकुई पुलिस थाने में भैंस के मालिकाना हक का अजीब मामला सामने आया है। यहां पर दो परिवार पर भैंस अपना अपना दावा जता रहे हैं। नौबत डीएनए टेस्ट और मंदिर-देवरों पर चढ़कर सौगंध खाने तक की आ गई। हालांकि बाद में मामला निपट गया।

हुआ यूं कि तीन दिन पहले दौसा जिले के बांदीकुई इलाके के बडियाल कलां निवासी विनोद मीणा की भैंस चोरी हो गई थी। विनोद के परिजन भैंस की तलाश में जुटे थे। तब उन्हें एक लोडिंग टैम्पो में दो भैंस ले जाती दिखीं। इस पर विनोद मीणा सहित अन्य ने पीछा कर टैम्पो को रुकवाया और दावा कर दिया कि इसमें एक भैंस उसकी है।
विवाद बढ़ने के कारण मौके पर बांदीकुई थाना पुलिस को बुलाया गया। पुलिस भैंस सहित टैम्पो को थाने ले आई। पुलिस थाने में दोनों भैंसों को बांध दिया गया। तब भी विनोद मीणा दो भैंसों में एक भैंस अपनी होने की बात पर अड़ा रहा।
दूसरी तरफ टैम्पो चालक मोतीवाड़ा निवासी मदन बणजारा भी इस बात पर अड़ा रहा कि वह भैंस खरीदकर ले जा रहा है। विनोद जिस भैंस को अपनी बता रहा है उसे वो पामाड़ी की सरवाला ढाणी से रामजीलाल सैनी से 28 हजार रुपये में खरीदकर लाया है। भैंस खरीदने की पुष्टि के लिए बांदीकूई पुलिस ने रामजीलाल को सोमवार सुबह थाने बुलाया। रामजीलाल ने थाने पहुंचकर मदन बंजारा को भैंस बेचने की पुष्टि कर दी, लेकिन विनोद अपनी बात पर अड़ा रहा।
मामला नहीं निपटा तो पुलिस ने भैंस की पहचान के लिए विनोद और रामजीलाल के परिवार की महिलाओं को बुलाया। दोनों पक्षों की महिलाओं ने भी अपनी-अपनी भैंस होने का दावा किया। इस पर पुलिस की मुसीबत तब और बढ़ी जब पुलिस थाने पहुंचे दोनों पक्षों के लोगों ने भैंस अपनी-अपनी होने की बात कहकर उसकी पहचान बतानी शुरू की। एक पक्ष बोला कि भैंस की पसली दबी हुई है तो दूसरा बोला उसका सिंग मुड़ा हुआ। ये दोनों ही बात सही थी।
जांच अधिकारी हरिसिंह ने बताया कि भैंस के मालिकाना हक का मामला निपटता नहीं देख दोनों पक्षों के सामने भैंस के डीएनए की जांच और ईमान धर्म का रास्ता अपनाया गया। उसने कहां कि जब तक डीएनए जांच हो तब तक दोनों पक्ष मंदिर चलकर ईमान धर्म से बताएं कि भैंस किसकी है? झूठ बोलेगे तो ईश्वर माफ नहीं करेगा, क्योंकि मंदिर चमत्कारी है। यह सुनकर विनोद कुमार पक्ष की महिलाओं ने फिर से भैंस को देखकर मना कर दिया कि वह उनकी नहीं है। तब जाकर मामला सुलझा। भैंस को मदन को सौंपी गई।












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