Adipurush Controversy को लेकर क्या सोचते हैं अनुराग बसु ? आशिकी 3 पर यह क्या कह दिया? देखिये,पढ़िए Interview
अनुराग बसु रहते तो मुंबई में हैं,लेकिन उनका दिल छत्तीसगढ़ से बसता है। कहा जाये तो उनका बचपन और जवानी रायपुर और भिलाई में ही गुजरी है।
रायपुर, 15 अक्टूबर। बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्माता और निर्देशक अनुराग बसु ने अपने अब तक के सिनेमाई करियर में एक से बढ़कर बेहतरीन फिल्में दी हैं। लाइफ इन ए मेट्रो, बर्फी, गैंगस्टर, जग्गा जासूस, काइट्स और मर्डर समेत दर्जनों फिल्मों ने उन्हें दर्शको के बेहद करीब ला दिया है। अनुराग बसु रहते तो मुंबई में हैं,लेकिन उनका दिल छत्तीसगढ़ से बसता है। दरअसल अनुराग बसु छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर के रहने वाले हैं,तो उनका जन्म रायपुर में हुआ था। कहा जाये तो उनका बचपन और जवानी रायपुर और भिलाई में ही गुजरी है। पढ़िए , वन इंडिया संवाददाता धीरेन्द्र गिरि गोस्वामी के साथ शुक्रवार को रायपुर में आयोजित "रायपुर आर्ट्, लिट्ररेचर एंड फ़िल्म फेस्टिवल" में हिस्सा लेने पहुंचे अनुराग बसु के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
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अनुराग बसु का भीतर से कैसे हैं ?
यह बड़ा मुश्किल से सवाल है। क्या आप जानते हैं कि आप भीतर से क्या हैं? वैसे यह सब मंथन अंदर चलते रहता है। कोई भी विचारधारा केवल बाहरी परत है। लेकिन मै बताऊ कि मेरे भीतर आज भी छोटे शहर का लड़का ही है,जिन बातो से मै खुश होता हूं या दुखी होता हूं,मेरे भीतर उसी छोटे शहर का लड़का बसा हुआ है। हो सकता है, यही बातें मेरी फिल्मो में दिखाई देती हों।

नए फ़िल्मकार भटके हुए नजर आते हैं,,क्या उन्हें ट्रेनिंग की जरूरत है? आजकल फिल्मो में संदेश की कमी है।
शेख्सपियर और कालिदास की कहानियों में क्या संदेश था? उसमे भी मनोरंजन था। कला, कला के लिए होती है। देखिये यह बहस हमेशा चलती रहेगी, सिनेमा मनोरंजन भी होता है ,किसी कोज़ के लिए भी होता है। जब सिनेमा कोज़ के लिए होता है प्रपोगेंडा हो जाता है,मनोरंजन के लिए रहता है,तो आर्ट बन जाता है।

आदिपुरुष विवाद अनुराग बासु क्या सोचते हैं ?
जो हाल में हुआ है , मै यह सोचता हूं कि लोग आजकल थोड़े कठोर हो गए हैं। क्या आपको बता है कि हिंदुस्तान में 300 रामायण है,जिनमे सबसे अपनी-अपनी धारणा रखी। हम अपने धर्म को ही नहीं समझ सके हैं। क्या आप जानते हैं कि लाहोली रामायण में सीता को रावण की बेटी बताया गया है। धर्म में अनुभूति जगह-जगह पर बदलते रहती है। यह किसी को खराब लगे या बुरा लगे ,लेकिन पहले फिल्म का इंतज़ार करना चाहिए , फिर उसे देखने के बाद अगर ख़राब लगती है या भावनाएं आहत होती हैं, तो बुराई करने के लिए स्वतंत्र हैं।

क्या मानते हैं, सोशल मीडिया में फिल्मो की होनी वाली ट्रोलिंग क्या पहले प्लांड होती हैं ?
ट्रोलर्स का होना समाज के लिए बहुत अच्छा है। पहले जो बिना काम के लड़के पुलिया में बैठकर आते जाते लोगों को छेड़ते थे,वही ट्विटर पर ट्रोलर बन गए हैं,इसलिए मोहल्ले में शांति है। इसे एजॉय करते हैं,क्योंकि यह सब मज़ेदार है। मेरे साथ नहीं हुआ,क्योंकि मै सोशल मीडिया में कहीं में हूं ही नहीं।

जग्गा जासूस को उतना पसंद नहीं किया गया?
हां यह बात है कि जग्गा जासूस कुछ लोगों को पसंद नहीं आई। मैंने इसे रायपुर शहर में रीलीज़ भी नहीं करवाया था,क्योंकि मुझे पता था,वह यहाँ के लोगों को पसंद नहीं आएगी। हर फ़िल्मकार को पता होता है कि वह कैसी फिल्म बना रहा है और किसे वह पसंद आएगी।

छत्तीसगढ़ के लिए क्या करना चाहेंगे ?
जब मौका मिलेगा,तो ऐसा जरूर करूंगा।कभी ना कभी अच्छी कहानी मिलेगी तो जरूर करूंगा क्योंकि यह कहानी पर निर्भर करता है। सिर्फ छत्तीसगढ़ को सोचकर में मै कहानी नहीं सोचता हूं। कहानी आएगी,छत्तीसगढ़ पर फिल्म बन जाएगी।

आप अपनी फिल्मो का विषय कैसे चुनते है?
मै ऐसी फिल्मे बनाता हूं,जिन्हे दर्शकों ने नहीं देखा है। ऐसी फिल्मो में रिस्क भी होता है कि दर्शकों को पसंद नहीं आई और फ्लॉप हो सकती हैं। तो मै ऐसी फिल्मे बनाता हूं, दर्शको जो पसंद आये,ऐसी फिल्मे तो सब बनाते हैं।

आने वाली फिल्मो के बारे में कोई जानकारी साझा करना चाहेंगे?
मुझे भी अखबारो के ज़रिये पता चलता है कि मै क्या करने वाला हूं। अब देखिये आशिकी 3 को लेकर मीडिया में घोषणा कर दी। जबकि मुझे खुद नहीं पता मेरी अगली फिल्म कौन सी होगी

आपकी नजर में भारत देश में सब कुछ कैसा चल रहा है ?
इन दिनों लिख रहा हूं। मुझे लगता है देश में सबकुछ अच्छा चल रहा है। मेरा मानना है कि हम खुद हैप्पी रहेंगे तो देश हैप्पी रहेगा।
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