Adhik Maas 2026: मलमास में क्यों नहीं होते हैं मांगलिक काम? क्या है इसके पीछे का कारण?
Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार मलमास यानी कि अधिक मास की शुरुआत आज से हो गई है, इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष और शुभ-अशुभ गतिविधियों के संतुलन का समय माना जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर लगभग 30 दिनों तक विराम लग जाता है। इसके बाद ही पुनः शुभ मुहूर्त शुरू होते हैं।
बहुत सारे लोगों को लगता है कि इस महीने में शुभ काम नहीं होने से ये महीना अशुभ है, क्या सच में ऐसा है? इस बारे में जवाब काशी के पंडित दयानंद शास्त्री ने दिया। उन्होंने कहा कि 'मलमास को हिंदी पंचांग में अधिक मास भी कहा जाता है। यह वह समय होता है जब सूर्य और चंद्र मासों के बीच तालमेल बनाने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।'

'इस महीने का स्वामी स्वयं भगवान विष्णु होते हैं, इसलिए इसे भक्ति, पूजा और साधना का महीना माना जाता है, न कि भौतिक या मांगलिक कार्यों का। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य आमतौर पर नहीं किए जाते। इसके पीछे धार्मिक, ज्योतिषीय और परंपरागत कारण हैं।'
'अतिरिक्त महीने को Adhik Maas कहा जाता है'
दयानंद शास्त्री ने आगे कहा कि 'हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, हर 32-33 महीनों में एक अतिरिक्त महीना आता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है। इस समय सूर्य और चंद्र मास का संतुलन अस्थिर माना जाता है जो कि नए कार्यों की शुरुआत के लिए अच्छा नहीं होता है।'
Adhik Maas को 'अधिकार विहीन' माना जाता था
तो वहीं पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक अधिकमास को किसी देवता के नाम से नहीं जोड़ा गया इसलिए इसे 'अधिकार विहीन' या 'अनधिकृत मास' भी कहा गया है, हालांकि बाद में भगवान विष्णु ने इसे अपना आशीर्वाद देकर पवित्र बनाया, इसी वजह से यह महीना भोग-विलास या नए आरंभ के बजाय भक्ति का समय माना जाता है। मांगलिक कार्य ना होने के पीछे एक बड़ा कारण ये भी है कि इस महीने में स्थिर शुभ मुहूर्तों की कमी होती है। मालूम हो कि इसे कहीं-कहीं पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं।
मलमास का महत्व
आध्यात्मिक साधना और ध्यान के लिए श्रेष्ठ समय होता है अधिकमास, इस दौरान किए गए दान-पुण्य से इंसान को सुख और सौभाग्य में वृ्द्धि होती है। इस महीने में जो कोई भी भगवान विष्णु की आराधना सच्चे मन से करता है उसकी दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की होती है। हो सके तो इस दौरान भगवान विष्णु जी के साथ लक्ष्मी जी की भी पूजा करें, जो कोई भी ऐसा करता है उसके घर-परिवार में कभी भी आर्थिक संकट नहीं आता है।














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