छत्तीसगढ़: राजभवन में अटका आरक्षण संशोधन विधेयक,सरकार चिंतित,BJP बोली- गवर्नर बेहतर जानती हैं, क्या करना है

छत्तीसगढ़ में आरक्षण को लेकर स्थिति जस की तस है। विधानसभा से पारित होने के बावजूद आरक्षण संशोधन विधेयक पर राज्यपाल अनुसूईया उइके के हस्ताक्षर लंबित हैं।

छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित होने के बावजूद आरक्षण संशोधन विधेयक राजभवन पहुंचकर रुक गए हैं। राज्यपाल अनुसूईया उइके ने अभी तक विधेयक पर हस्ताक्षर ही नहीं किये। इसके कारण से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और गरीबों के लिए बनाए आरक्षण के नवीन प्रावधान फ़िलहाल लागू नहीं हो पाए हैं। विधानसभा से पास होने के बाद विधेयक को राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया था।

अभी तक नहीं हुए राज्यपाल के हस्ताक्षर

अभी तक नहीं हुए राज्यपाल के हस्ताक्षर

छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके ने बीते शनिवार को कहा कि वह आरक्षण संशोधन विधेयक 2022 पर सोमवार काे हस्ताक्षर करेंगी,लेकिन मंगलवार बीत जाने के बाद भी अभी तक यह कार्य रुका हुआ है। अगर राज्यपाल ऐसा कर देतीं,तो छत्तीसगढ़ में नई आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती । इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में 76 प्रतिशत आरक्षण होने की स्थिति निर्मित हो जाती।

क्या है आरक्षण का मामला ?

क्या है आरक्षण का मामला ?

ज्ञात हो कि 19 सितम्बर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी प्रकरण में फैसला सुनाते ही छत्तीसगढ़ में चल रहे 58 फीसदी आरक्षण को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था। उसके बाद से किसी भी जाति वर्ग के लिए आरक्षण खत्म हो गया था। इस संवैधनिक संकट से निकलने के लिए भूपेश सरकार ने 1 और 2 दिसम्बर को विधानसभा का विशेष सत्र आहूत करके आरक्षण से जुड़े 2 संशोधन विधेयक पारित करवाकर आरक्षण को बढ़ाकर 76 प्रतिशत कर दिया गया था।

राज्यपाल ने रही हैं क़ानूनी सलाह

राज्यपाल ने रही हैं क़ानूनी सलाह

विधानसभा में छत्तीसगढ़ लोक सेवाओं में (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन विधेयक-2022 और शैक्षणिक संस्थानों में (आरक्षण) संशोधन विधेयक-2022 पारित तो हो गया है,लेकिन राजभवन में जाकर अटक गया है।

राज्यपाल का कहना है कि वह क़ानूनी सलाह लेकर ही विधेयकों पर अपने दस्तखत करेंगी। मिली जानकारी के मुताबिक राजभवन के कानूनी सलाहकारों और अफसरों की टीम विधेयक की समीक्षा कर रही है,साथ ही जांचने की कोशिश कर रही है कि अगर इन कानूनों को कोर्ट में चुनौती दी जाती है,तो राज्य सरकार के पास क्या हल है।

देरी होने से भूपेश सरकार चिंतित

देरी होने से भूपेश सरकार चिंतित

इस बीच छत्तीसगढ़ सरकार के संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा है , आरक्षण संबंधी विधेयक विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ था।राज्यपाल ने ही सरकार को विशेष सत्र बुलाकर आरक्षण के पक्ष में कानून बनाने की सलाह दी थी। लेकिन राजभवन में केवल कानूनी सलाह में ही तीन दिन लगा गए हैं। यह हम चिंतित कर रहा है।

विपक्ष ने कहा, राज्यपाल पर टिप्पणी अनुचित

विपक्ष ने कहा, राज्यपाल पर टिप्पणी अनुचित

इधर विपक्ष ने कांग्रेस सरकार पर कटाक्ष किया है। भारतीय जनता पार्टी की छत्तीसगढ़ इकाई के मीडिया प्रभारी अमित चिमनानी ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा बिलो द बेल्ट राजनीति के कीर्तिमान स्थापित किए है कभी जांच एजेसियो पर टिप्पणी ,कभी न्यायालय पर टिप्पणी,कभी राज्यपाल पर टिप्पणी कांग्रेस ने न कभी लोकतंत्र माना है, ना कभी संविधान को माना है, ना संवैधानिक पदों की वह इज्जत करते हैं ,न वैधानिक पद पर बैठे लोगों की ।

कांग्रेस चाहती है कि कोर्ट भी उनके हिसाब से चलें, राज्यपाल भी उनके हिसाब से चले हैं सरकारें भी उनके हिसाब से चलें ,अधिकारी भी उनके हिसाब से चलें क्योंकि वह शुरू से एक तानाशाह बन कर देश में राज करते आए हैं। चिमनानी ने आगे कहा कि राज्यपाल को क्या करना है वह बेहतर जानते हैं प्रदेश के महामहिम के बारे में किसी भी प्रकार की टिप्पणी करना अशोभनीय एवं निंदनीय है।

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