फरीदकोट शाही संपत्ति विवाद खत्‍म, सुप्रीम कोर्ट ने महाराजा की बेटियों को दिलाया मालिकाना हक

फरीदकोट। फरीदकोट रिसायत के शाही परिवार की हजारों करोड़ की संपत्ति का कानूनी-विवाद अब थम जाएगा। 30 साल की लंबी लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने समाप्त करा दिया। इस फैसले से, महाराजा की बेटियों को उनकी संपत्तियों में बड़ा हिस्सा मिला है। तत्कालीन शाही परिवार के पास पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में चल और अचल संपत्ति थी, जिसे लेकर विवाद चला आ रहा था। इस मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था। अब उसी फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्णय लिया है।

30 साल लंबी कानूनी-लड़ाई अब खत्‍म

30 साल लंबी कानूनी-लड़ाई अब खत्‍म

सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी कि बुधवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें तत्कालीन फरीदकोट महाराजा हरिंदर सिंह बराड़ की 20,000 करोड़ रुपये की संपत्ति में बहुमत उनकी बेटियों अमृत कौर और दीपिंदर कौर को दिया गया था। इसी के साथ विरासत के लिए चली आ रही 30 साल की लंबी लड़ाई तब समाप्‍त हुई जब महारावल खेवाजी ट्रस्ट, जो संपत्तियों की देखभाल कर रहा था, के अधिकार को "शून्य" (अमान्य) घोषित कर दिया गया।

महारावल खेवाजी ट्रस्ट को भंग कर दिया गया

महारावल खेवाजी ट्रस्ट को भंग कर दिया गया

मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति सिद्धंशु धूलिया की पीठ ने 28 जुलाई को आदेश सुरक्षित रखने के बाद पार्टियों के बीच संपत्तियों के हिस्से के संबंध में उच्च न्यायालय के आदेश में कुछ संशोधनों का आदेश दिया। तभी 33 साल के ट्रस्ट को भंग होने की संभावना जताई जाने लगी। कहा जा रहा था कि, ट्रस्ट को शाही संपत्तियों के मामलों को चलाने की अनुमति मिलनी थी। ट्रस्ट के सीईओ जागीर सिंह सरन ने कहा कि अदालत ने वसीयत को अमान्य करने का आदेश दिया है। उन्‍होंने कहा कि, हमें मौखिक आदेश मिल गए हैं और हम पूर्ण लिखित आदेश का इंतजार कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने सुनाया था मामले में फैसला

हाईकोर्ट ने सुनाया था मामले में फैसला

गौरतलब हो कि, 2020 में, ट्रस्ट ने बराड़ की 1 जून, 1982 की वसीयत को जाली घोषित करने वाले उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था। तब शीर्ष अदालत ने अगस्त 2020 में फैसला आने तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया और ट्रस्ट को कार्यवाहक के रूप में जारी रखने की अनुमति दी। जून 2020 में, उच्च न्यायालय ने अमृत कौर, जिन्होंने 1992 में वसीयत को चुनौती दी थी, और दीपिंदर कौर को 20,000 करोड़ की संपत्ति में हिस्सा देने के चंडीगढ़ अदालत के आदेश को बरकरार रखा।

फरीदकोट के शासक बने थे बराड़

फरीदकोट के शासक बने थे बराड़

अदालत ने कहा कि महाराजा के भाई मंजीत इंदर सिंह के वंशजों को उनकी मां मोहिंदर कौर का हिस्सा मिलेगा। साथ ही कहा गया कि, ट्रस्टियों ने संपत्ति पर कब्जा करने के लिए वसीयत बनाने की साजिश रची। अदालत ने कहा, "वसीयत जाली, काल्पनिक, मनगढ़ंत और संदिग्ध परिस्थितियों से निकली हुई साबित होती है।"
उससे पहले 2013 में, चंडीगढ़ कोर्ट ने वसीयत को अवैध और शून्य घोषित कर दिया और बराड़ की बेटियों को विरासत सौंपे जाने को कहा। बराड़, जिन्हें 1918 में तीन साल की उम्र में फरीदकोट के शासक के रूप में ताज पहनाया गया था, की शादी नरिंदर कौर से हुई थी और उस दंपति की तीन बेटियाँ, अमृत कौर, दीपिंदर कौर और महीपिंदर कौर हुईं। और, उनका एक बेटा टिक्का हरमोहिंदर सिंह था।

अमृत कौर ने अदालत में दीवानी मुकदमा दायर किया था

अमृत कौर ने अदालत में दीवानी मुकदमा दायर किया था

वर्ष 1981 में जब उनके बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई तो बराड़ डिप्रेशन में चले गए। महीनों बाद एक वसीयत सामने आई। जिसमें ट्रस्ट को उसकी संपत्तियों की देखभाल करने के लिए कहा गया था। तब बराड़ की पत्नी और मां जीवित थीं, लेकिन उन्हें अंधेरे में रखा गया था। 1989 में बराड़ की मौत के बाद सामने आए वसीयतनामे में कहा गया कि अमृत कौर ने उनकी मर्जी के खिलाफ शादी की थी और इसलिए उन्हें विरासत में उनका हिस्‍सा नहीं मिला। तब अमृत ​​कौर ने 1992 में वसीयत को चुनौती देते हुए जिला अदालत में एक दीवानी मुकदमा दायर किया, जिसमें कहा गया था कि उनके पिता कानूनी रूप से ट्रस्ट को अपनी संपत्ति नहीं दे सकते थे क्योंकि वे पैतृक थे और हिंदू संयुक्त परिवार से संबंधित कानून द्वारा शासित थे। उसने वसीयत की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाया।

2001 में महीपिंदर कौर की मौत
कुछ वर्षों बाद महीपिंदर कौर की 2001 में शिमला में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जिसके बाद भी मामला अदालत में चलता रहा। मालूम हो कि, तत्कालीन शाही परिवार के पास पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में चल और अचल संपत्ति है। इनमें फरीदकोट का राजमहल भी शामिल है, जो 14 एकड़ में फैला है। वहीं, पैलेस ग्राउंड के एक हिस्से में 150 बेड का चैरिटेबल हॉस्पिटल बन गया है। अन्य संपत्तियों में फरीदकोट का किला मुबारक 10 एकड़ में फैला हुआ है। और नई दिल्ली का फरीदकोट हाउस कॉपरनिकस मार्ग पर प्रमुख भूमि पर स्थित है।

सरकार ने प्रॉपर्टीज को किराए पर उठाया
एक रिपोर्ट में बताया गया कि, केंद्र सरकार ने उक्‍त संपत्ति को ₹17.50 लाख के मासिक किराए पर पट्टे पर दिया है। नौ साल पहले इसकी कीमत लगभग ₹1,200 करोड़ थी।

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