किसान आंदोलन को पूरा होने वाला है 1 साल, क्या आंदोलन को तेज़ करेंगे किसान, जानिए प्लान ?
तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठन काफ़ी लंबे अरसे केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। ज़्यादातर सियासी दल किसान आंदोलन को चुनावी मुद्दा बनाते हुए ख़त्म करने की कोशिश कर रही है।
चंडीगढ़, 13 नवम्बर, 2021। तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठन काफ़ी लंबे अरसे केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। ज़्यादातर सियासी दल किसान आंदोलन को चुनावी मुद्दा बनाते हुए ख़त्म करने की कोशिश कर रही है। केद्र सरकार भी अब किसान आंदोलन का हल निकाल कर मामले को शांत करवाने की कोशिश में लगी हुई है। वहीं किसान नेता गुरनाम सिंह चारुनी ने कहा है कि भारतीय किसान यूनियन (चारुनी) 25 नवंबर से राज्य में शहीद सम्मान यात्रा कर अपना आंदोलन तेज करेगी और हरियाणा और पंजाब के किसानों से उनका कर्ज न चुकाने का अनुरोध करेगी। किसान नेता गुरनाम सिंह चारुनी ने बताया करनाल में भारतीय किसान संघ (चढूनी) की कोर कमेटी की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया।

शहीद सम्मान यात्रा निकालेंगे किसान- चढूनी
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि अगर 5 दिसंबर तक तीन कानूनों को निरस्त करने और एमएसपी की गारंटी सहित मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो किसान नेता किसानों से उनका कर्ज नहीं चुकाने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि किसान संघ भी किसानों को समर्थन का आश्वासन देंगे। क्योंकि किसान संघ कभी भी बैंकों को कर्जदार किसानों की गिरवी जमीन की नीलामी नहीं करने देंगे। उन्होंने कहा कि कोर कमेटी के सदस्यों ने तय किया है कि हजारों किसान 25 नवंबर को शहीद सम्मान यात्रा निकालेंगे। अंबाला के मोहरा अनाज मंडी से पैदल मार्च करते हुए 5 दिसंबर को टिकरी बॉर्डर पर पहुंचेगे। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों ने यह पैदल मार्च अंबाला से शुरू करने का फैसला लिया है क्योंकि पिछले साल 26 नवंबर को किसानों ने इसी जगह से दिल्ली-कूच की शुरुआत की थी।

आंदोलन खत्म करने की भी चल रही बात
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी किसान आंदोलन का हल निकाल कर सियासी माइलेज लेने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह की पहल से किसान आंदोलन ख़त्म हो गया तो इसका पूरा श्रेय कैप्टन को जाएगा। इसलिए पूरे आंदोलन का क्रेडिट किसान यूनियन खुद लेना चाहती है। इस बाबत ही किसान यूनियन रणनीति तैयार कर बैक चैनल टॉक शुरू करने जा रही है। किसान आंदोलन के बड़े समर्थन वाले यूनियन भी चाह रहे हैं कि जल्द आंदोलन खत्म हो। क्योंकि साल भर से दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर बैठे किसान यूनियन के पास अब संसाधनों की कमी हो रही है और किसान संगठनों के पास अपने समर्थकों को मोटिवेट करने के उपाय भी नहीं सूझ रहे हैं।

किसान आंदोलन के पूरे होने को हैं 1 साल
आपको बता दें कि 26 नवंबर 2020 को किसान आंदोलन शुरू होने के बाद 1 दिसंबर से किसानों ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर मंच लगाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने लोहे की बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद कर दिया था। 26 जनवरी को लाल किले की घटना होने के बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से 30 जनवरी को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, यूपी गेट से गाजीपुर सर्विस लेन होते हुए दिल्ली जाने वाली लाइन पर सीमेंटेड बैरियर लगाकर रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।
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