Tokyo Olympic :'कभी हॉकी ख़रीदने के पैसे नहीं थे', ओलंपिक मेडल लाने वाली टीम के कप्तान की कहानी
आज जिस खिलाड़ी की वजह से टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने देश का नाम रौशन किया है, उनका बचपन बहुत ही तकलीफ़ों में गुज़रा है। भारत को 41 साल के बाद जिस खिलाड़ी ने मेडल दिलाया है एक वक्त था कि उनके पास हॉकी ख़रीद
जालंधर, अगस्त 6, 2021। आज जिस खिलाड़ी की वजह से टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने देश का नाम रौशन किया है, उनका बचपन बहुत ही तकलीफ़ों में गुज़रा है। भारत को 41 साल के बाद जिस खिलाड़ी ने मेडल दिलाया है एक वक्त था कि उनके पास हॉकी ख़रीदने तक के पैसे नहीं थे। आइए जानते हैं भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह की संघर्ष की कहानी। किस तरह उन्होंने कामयाबी की सीढ़ीयां चढ़ीं और उनकी ज़िंदगी पूरे तरीक़े से बदल गई। मनप्रीत सिंह पंजाब स्थित जालंधर के मिट्ठापुर से ताल्लुक रखते हैं। उनकी मां मंजीत कौर ने पुराने दिनों को याद करते हुए एक वाकया बताया कि दिन मनप्रीत ने हॉकी स्टिक मांगी लेकिन ज़्यादा पैसे नहीं होने की वजह से मैं उसे हॉकी नहीं दिलवा पाई तो वह बहुत रोया था। उसके लगाव को देखते हुए पूर्व भारतीय खिलाड़ी परगट सिंह ने उसे हॉकी स्टिक ख़रीद कर दी थी।

मनप्रीत के पिता 1992 में दुबई गए थे और उनका बाकी परिवार पंजाब में ही था। साल 1995 में मनप्रीत के पिता मानसिक समस्या के चलते वापस भारत अपने गाँव आ गए थे और उसके बाद वह कुछ काम नहीं कर सके। बस यहीं से पूरे परिवार पर संकट छा गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि परिवार सड़क पर आ गया। तीन बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी मंजीत कौर पर आ गई। उन्होंने बच्चों को पालने के लिए पशुओं को चारा डालने और महिलाओं के कपड़े सिलने का काम किया।मनप्रीत जब 7 वर्ष के थे, तब उस समय इसी गांव के रहने वाले पूर्व भारतीय खिलाड़ी परगट सिंह के साथ खिलाड़ियों को अभ्यास करते देखते थे। यहीं से उनमें हॉकी का शौक जागा।
आपको बता दें कि भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने हाथ में तिरंगा लेकर टोक्यो ओलंपिक सेरेमनी में भारतीय दल का नेतृत्व किया था, उनके साथ मुक्केबाज मैरीकॉम भी थीं। मनप्रीत सिंह 21 साल बाद ओलंपिक में टीम इंडिया की कमान संभालने वाले पंजाब के पहले खिलाड़ी हैं। इससे पहले वर्ष 2000 में पंजाब के खिलाड़ी रमनदीप सिंह कप्तान थे। भारत ने हॉकी में चार दशक बाद पदक जीता है। इससे पहले हॉकी टीम ने साल 1980 में मास्को में हुए ओलंपिक में पदक जीता था। भारत ने ओलंपिक में हॉकी स्पर्धा में 8 गोल्ड मेडल जीते हैं। ओलंपिक में भारत द्वारा हॉकी में जीता गया यह 12वां पदक है।
मनप्रीत इली से 2012 में मलयेशिया में सुल्तान ऑफ जौहर कप के दौरान मिले थे। स्टेडियम के बाहत ड्यूटी पर तैनात एक अधिकारी से मनप्रीत ने इली सादिक का नंबर लिया था। उसके बाद दोनों ने मुलाक़ात की और फिर मनप्रीत बिना वक्त गंवाए अपनी मोहब्बत का इज़हार कर बैठे। इली सादिक ने भी उनका प्रोपोज़ल खुशी-खुशी क़बूल कर लिया। मनप्रीत सिंह ने 16 दिसम्बर 2020 को इली के साथ विवाह के बंधन में बंध गए। उन्होंने जालंधर के गुरु तेग बहादुर नगर स्थित गुरुद्वारा साहिब में शादी के फेरे लिए। इली सादिक का बाद में पंजाबी नाम नवप्रीत कौर रखा गया।












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