बच्चों को अच्छी और सस्ती शिक्षा देना चाहती है मान सरकार, निजी स्कूलों के लिए बनाई टास्क फोर्स
पंजाब सरकार ने दिल्ली की AAP सरकार की तरह निजी स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने का फैसला लिया है। जनता सीधे शिक्षा मंत्रालय से कंप्लेन कर सकेगी। जानिए पंजाब सरकार की सराहनीय पहल के बारे में

दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया स्कूलों में सुधार के कारण बेहद लोकप्रिय हैं। सीएम अरविंद केजरीवाल की AAP सरकार का मॉडल बेहद लोकप्रिय है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सुप्रीमो केजरीवाल ने पंजाब में भी दिल्ली मॉडल पर एजुकेशन की बात कही थी। AAP की पंजाब सरकार और शिक्षा विभाग ने इसकी नजीर भी दिखानी शुरू कर दी है। स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए शिक्षा मंत्री ने टास्क फोर्स का गठन किया है। इस फैसले से बच्चों और गरीब परिवारों के शोषण पर लगाम लगेगी।
पंजाब में मनमानी फीस वसूल रहे निजी स्कूलों को सबक सिखाने के लिए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने टास्क फोर्स गठन का ऐलान करते हुए कहा कि स्कूलों को किताबें खरीदने के लिए 20 दुकानों की सूची बनानी होगी। अभिभावक और बच्चे अपनी सुविधा से किताबें खरीद सकेंगे। जिला स्तरीय टास्क फोर्स टीमों की घोषणा से पंजाब के लोगों को काफी राहत मिलने की संभावना है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब में निजी स्कूलों में मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई जा रही है। किताबों को खरीदने के लिए निश्चित दुकान पर भेजने की कोशिश हो रही है। स्कूलों को कमाई का जरिया मानने वाले संस्थानों में कई अन्य शुल्क भी लगाए जाने की खबरों के बीच पंजाब सरकार ने इसका संज्ञान लिया और कहा, सीएम भगवंत मान को भी निजी स्कूलों द्वारा अधिक फीस वसूले जाने की शिकायतें मिली हैं. उन्होंने कहा कि मान ने इसे गंभीरता से लिया है और कहा है कि इस तरह का रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भगवंत मान की सरकार में स्कूली शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी जीरो टॉलरेंस का संकेत दिया और कहा, अधिक फीस वसूली की शिकायतों से निपटने के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स टीमें काम करेंगी। बैंस ने कहा, पंजाब के हर जिले में टास्क फोर्स का गठन किया गया है। टीम में तीन सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक शामिल हैं। टास्क फोर्स शिकायतों की जांच कर अपनी रिपोर्ट नियामक प्राधिकरण को सौंपेगी।
शिक्षा मंत्री बैंस ने बताया, कई दिनों से छात्रों और अभिभावकों की तरफ से निजी स्कूलों में दाखिले के दौरान मनमानी की कंप्लने मिल रही थी। अभिभावकों से मनमाना शुल्क वसूलने की शिकायत मिली, किताबें और अन्य शुल्कों की वसूली भी हो रही है। शिक्षा मंत्री के अनुसार, कुछ दिन पहले सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) के माध्यम से निजी स्कूलों को लेटर लिखा गया। स्कलों को किताबों/नोटबुकों की बिक्री और फीस/फंड वसूलने के संबंध में स्कूल नियामक प्राधिकरण के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।

स्कूलों की मनमानी पर AAP सरकार की जीरो टॉलरेंस का अंदाजा इसी से मिलता है कि शिक्षा मंत्री बैंस ने निजी स्कूलों के मालिकों और प्रबंधन के सदस्यों को केवल एनसीईआरटी की किताबें लागू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, ये चौंकाने वाला है कि नर्सरी और पहली कक्षा की किताबें 7,000 रुपये में बिक रही हैं। अकेले गणित की एक किताब 600 रुपये में बिक रही है।
पंजाब के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और अभिभावकों का शोषण न हो, ये सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार ने कम से कम 20 दुकानों की सूची जारी करने को कहा है। अभिभावक इनमें से किसी से भी अपनी मर्जी से किताबें खरीद सकते हैं। किसी दुकान का एकाधिकार नहीं हो सकता। शिक्षा मंत्री बैंस ने कहा, नियमों के मुताबिक कस्बों में निजी स्कूलों को कम से कम तीन से पांच दुकानों के नाम देने होते हैं। लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे बड़े शहरों में 20 नाम देने के नियम हैं।
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इन फैसलों के बाद भी अगर कोई स्कूल मनमानी करता है तो उसकी कंप्लेन के लिए शिक्षा मंत्री बैंस ने ई-मेल आईडी- [email protected] भी जारी किया। छात्र और अभिभावक अधिक शुल्क वसूली या किसी और परेशानी के बारे में सीधा सरकार से शिकायत कर सकेंगे। इस मेल आईडी पर दर्ज कंप्लेन सीधे शिक्षा मंत्री के दफ्तर में पहुंचेंगी। हर शिकायत की जांच होगी।
बैंस ने निजी स्कूलों को आगाह किया है कि 30 अप्रैल तक स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर सहित फीस/फंड में वृद्धि के संबंध में पंजाब सरकार के नियमानुसार निर्धारित प्रोफार्मा में जानकारी सरकार के पास जमा कराई जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि AAP सरकार पंजाब में शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनने देगी। अभिभावकों से अधिक पैसे वसूलने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पंजाब सरकार की इस तत्पर कार्रवाई से दिल्ली के बाद एक और राज्य से शिक्षा जगत में सुधार की उम्मीद जगती है।












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