सरकार को दिया 31 किसान जत्थेबंदियों ने अल्टीमेटम: कहा- सभी मसलों का हल करें, नहीं तो फिर जुटेंगे हजारों किसान
फगवाड़ा। किसानों की 31 जत्थेबंदियां फिर आंदोलन की राह पर हैं। यहां 31 किसान जत्थेबंदियों ने अब अल्टीमेटम दिया है। किसान नेताओं का कहना है कि, सभी किसानों की गन्ने की बकाया राशि के भुगतान समेत सभी मसलों का हल किया जाए। इसके लिए सरकार के पास 30 अगस्त तक का समय है। यदि हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो 4 सितंबर को फगवाड़ा में बड़ी संख्या में किसान जुटेंगे और आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि, पंजाब के फगवाड़ा में शुगर मिल के सामने प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे हैं।

'किसानों के सभी मसलों का हल चाहिए'
सरकार को चेतावनी देने के लिए किसानों की 31 जत्थेबंदियों के प्रतिनिधि आज फगवाड़ा में शुगर मिल के सामने हाईवे पर चल रहे धरने में इकट्ठा हुए। जहां प्रतिनिधियों ने कहा कि, सरकार के पास 30 अगस्त तक का समय है। यदि सरकार ने 30 अगस्त तक किसानों के सभी मसलों का हल न निकाला तो 4 सितंबर को आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। एक किसान नेता ने बताया कि, किसानों के प्रतिनिधियों की बैठक फगवाड़ा में ही गुरुद्वारा सुखचैन साहिब में हुई। उस बैठक में बताया गया कि पंजाब सरकार ने कहा है कि हरियाणा के भूना में पंजाब सरकार की जमीन बेची गई है जिसकी 23 करोड़ की पेमेंट आनी है। पेमेंट आते ही 30 अगस्त तक सभी किसानों की गन्ने की बकाया राशि उनके खातों में डाल दी जाएगी। एक किसान नेता ने कहा कि सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि फगवाड़ा की बंद पड़ी मिल को वह अपने स्तर पर चलाएगी।'

सरकार को 30 अगस्त तक का समय दिया
सरकार ने कुछ समय पहले किसानों की जत्थेबंदियों को बताया था कि, फगवाड़ा की बंद पड़ी मिल के लिए वह निजी कंपनियों से बात कर रही है और सीजन से पहले-पहले इसे चालू कर देगी। इस पर भी अब किसानों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि, सरकार को 30 अगस्त से पहले-पहले जवाब देना है कि मिल को चालू करने की बात सिरे चढ़ी है या नहीं। उन्होंने कहा कि इन सभी मसलों को लेकर 30 अगस्त तक सरकार ने खुद समय मांगा था। इसलिए हमने उसे 30 अगस्त तक का समय दे दिया है।

सरकार से बकाया ब्याज समेत लिया जाएगा
किसान नेताओं ने कहा कि 30 अगस्त को हम समीक्षा बैठक करेंगे। उसमें आगे की रणनीति पर विचार विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फगवाड़ा में लगा किसानों का धरना अनिश्चितकाल के लिए अभी जारी रहेगा। वहीं, बहरहाल, किसानों ने यह भी फैसला लिया है कि गन्ने का बकाया वह ब्याज समेत लेंगे। उनका कहना है कि, उनका बकाया पिछले तीन साल से खड़ा है। उन्हें बैंक से लिए कर्ज पर ब्याज पड़ा था तो वह सरकार से बकाया वह अपनी राशि ब्याज के साथ ही लेंगे।












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