प्रियंका गांधी के बयान से पंजाब में चढ़ा सियासी पारा, कांग्रेस को नफ़ा या नुकसान, जानिये ?
पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के दिन क़रीब आ रहे हैं। एक तरफ़ जहां सभी सियासी पार्टियां चुनावी तैयारियों में जुटी हुई हैं।
चंडीगढ़, 14 फरवरी 2022। पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के दिन क़रीब आ रहे हैं। एक तरफ़ जहां सभी सियासी पार्टियां चुनावी तैयारियों में जुटी हुई हैं। वहीं दूसरी तरफ़ पंजाब कांग्रेस की मुश्किलें ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। कभी पार्टी गुटबाज़ी का शिकार हो रही है तो कभी नेताओं की बयानबाज़ी कांग्रेस के लिए ही परेशानी का सबब बन रही है। दरअसल पिछले दिनों कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पंजाब के कोटकपूरा में 'नवी सोच, नवा पंजाब' रैली को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को इसलिए हटाना पड़ा क्योंकि अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली पंजाब सरकार को दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी चला रही थी।

सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज़
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के इस बयान के बाद पंजाब में सियासी पारा चढ़ चुका है। मतदाताओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस का संगठन मज़बूत नहीं है। कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली पंजाब सरकार कांग्रेस की ही थी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को यह तक पता नहीं चला की पिछले साढ़े चार साल से भारतीय जनता पार्टी पंजाब सरकार को कंट्रोल कर रही है। अचानक से चुनाव के समय पता चला कि कैप्टन भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं। यह सब कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी की नाकामियों को छुपाने के लिए चुनावी जुमले दे रहे हैं। इसी मामले पर सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के आलाकमान की तरफ़ से इस तरह की बयानबाज़ी से कांग्रेस को नुकसान पहुंच सकता है।

कांग्रेस को हो सकता है नुकसान
कांग्रेस आलाकमान की तरफ़ से इस तरह की बयानाबाज़ी बिलकुल ही बेतुकी है। कांग्रेस के राज्य सरकार को केंद्र की भाजपा सरकार चला रही है, इस तरह के बयान तो नए नेता भी देने से बचते हैं। कैप्टन पर निशाना साधने की चक्कर में अपनी ही पार्टियों की कमी को जनता के सामने उजागर कर रहे हैं। यही वजह है कि विपक्ष भी इसे मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस पर हमलावर है। इसके साथ ही मतदाताओं के बीच में भी यह चर्चा है कि कांग्रेस में गुटबाज़ी की चक्कर में पंजाब के हितों की अनदेखी हो रही है। अगर इस तरह से कांग्रेस नेता बिना सोचे समझे बयानबाज़ी करेंगे तो इसका सीधा फ़ायदा पंजाब में आम आदमी पार्टी को मिलेगा। क्योंकि भाजपा को शिरोमणि अकाली दल के अलग होने और किसान आंदोलन की वजह नुकसान का समान करना पड़ा सकता है। वहीं कुछ सीटों पर भाजपा की वजह से अकाली दल को नुकसान हो सकता है।

कांग्रेस नेतृत्व पर ही उठ रहे सवाल
कोटकपूरा में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने 'नवी सोच, नवा पंजाब' रैली को संबोधित पिछले कार्यकाल का ज़िक्र करते हुए पंजाब में हमारी सरकार थी, कार्यकाल के दैरान कुछ कमियां भी रही। पंजाब सरकार अपने रास्ते से भटक गई थी, पंजाब सरकार दिल्ली से केन्द्र की भाजपा सरकार के हाथों चलाई जा रही थी। इस गठजोड़ का खुलासा होने के बाद हमें उस सरकार को बदलना पड़ा। हालांकि प्रियंका गांधी वाड्रा ने कैप्टन का नाम नहीं लेते हुए ये सारी बाते कहीं लेकिन सभी जानते हैं कि पंजाब के किसे कुर्सी से हटाया गया और क्यों, चुनाव के वक़्त इस तरह की बयानबाज़ी से कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व ही निशाने पर आ गया है।
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