पंजाब: SAS नगर विधानसभा सीट का सियासी समीकरण, आम आदमी पार्टी मिल सकता है फ़ायदा, जानिए कैसे ?

पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी सियासी पार्टियां सत्ता पर क़ाबिज़ होने का दावा कर रही हैं।

चंडीगढ़, 16 फरवरी 2022। पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी सियासी पार्टियां सत्ता पर क़ाबिज़ होने का दावा कर रही हैं। सभी सियासी दलों के प्रत्याशी अपने विधानसभा हलके में चुनावी प्रचार में जुटे हुए हैं। आज हम आपको एसएएस नगर विधानसभा सीट के सियासी समीकरण और चुनावी इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव के सियासी रण में कांग्रेस ने बलवीर सिंह सिद्धू को उम्मीदवार घोषित किया है। भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से संजीव वशिष्ठ चुनावी ताल ठोक रहे हैं। वहीं शिरोमणि अकाली दल की तरफ़ से परविंदर सिंह सोहना चुनावी मैदान में उतरे हैं। आम आदमी पार्टी की तरफ़ से कुलवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है।

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हैट्रिक लगाने की कोशिश में बलवीर सिद्धू
साहिबजादा अजीत सिंह नगर विधानसभा सीट की बात की जाए तो यह सीट साहिबजादा अजीत सिंह नगर जिले में आती है। इस सीट विधानसभा सीट पिछले दस सालों से कांग्रेस परचम लहरा रही है। कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी बलबीर सिंह सिद्धू लगातार 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से विधायक चुने जाते रहे हैं। ग़ौरतलब है कि इस बार भी कांग्रेस ने उन्हें ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार बलवीर सिंह सिद्धू ने 47.86 फ़िसद वोट हासिल किया था। उन्होंने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार नरेंद्र सिंह को 66 हज़ार 844 वोट हासिल कर हराया था। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी नरेंद्र सिंह को 38 हज़ार 971 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा था।

2012 में कांग्रेस ने दर्ज की थी जीत
एसएएस नगर विधानसभा सीट के पर 2012 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस नेता बलवीर सिंह सिद्धू ने कांग्रेस का झंडा बुलंद किया था। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी बलवंत सिंह को शिकस्त दी थी। इस चुनाव में बलवीर सिंह सिद्धू ने 64 हज़ार 501 वोट हासिल किया था। वहीं शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार बलवंत सिंह को 45 हज़ार 249 वोट मिला था। सियासी जानकारों की मानें तो इस बार एसएएस नगर विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी का क़ब्ज़ा हो सकता है। क्योंकि कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बाद जब यहां के मौजूदा विधायक बलवीर सिंह सिद्धू को मंत्री पद से हटाया गया तो उनके समर्थकों में काफ़ी नाराजगी थी। उस दौरान ही कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी से किनारा कर आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया था।

AAP को मिल सकता है चुनावी फ़ायदा
कांग्रेस में गुटबाज़ी चरम पर है और पंजाब के कुछ विधानसभा सीटों पर कांग्रेस नेताओं के बाग़ी तेवर की वजह से भी कांग्रेस की स्थिती ख़राब होती हुई नज़र आ रही है। अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस की स्थिती ख़राब होने से आम आदमी पार्टी को ही क्यों फ़ायदा पहुंचेगा दूसरी किसी और पार्टी को क्यों नहीं फ़ायदा पहुंच सकता है। इस पर सियासी जानकारों का कहना है कि पहले शिअद-भाजपा गठबंधन के साथ चुनावी मैदान में उतरती थी लेकिन इस बार दोनों दलों के रास्ते अलग हो चुके हैं। दोनों दलों ने चुनावी मैदान में अपने-अपने प्रत्याशियों को उतारा है यही वजह है कि उनके वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है। चूंकि आम आदमी पार्टी में गुटबाज़ी नहीं है इसलिए आप को सियासी फ़ायदा मिलने की उम्मीद है।

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