Nepal News: क्या है नेपाल का नया TIV सिस्टम? ऑनलाइन के चक्कर में बॉर्डर पर फंसे लोग, बालेन सरकार की थू-थू
Nepal New Tiv System: नेपाल सरकार ने भारत से आने वाले वाहनों के लिए नई ऑनलाइन कस्टम व्यवस्था लागू की है। सरकार का मकसद सीमा पर प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना था, लेकिन शुरुआती दिनों में इसका उल्टा असर देखने को मिल रहा है। भारत-नेपाल सीमा के कई चेकपोस्ट पर लंबी कतारें लग रही हैं और यात्रियों को 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
कई लोगों को ऑनलाइन सिस्टम की जानकारी नहीं है, जबकि तकनीकी मदद भी पर्याप्त नहीं मिल रही। ऐसे में दलाल सक्रिय हो गए हैं और लोगों से अतिरिक्त पैसे लेकर रजिस्ट्रेशन का काम करवा रहे हैं।

क्या है नेपाल का नया TIV सिस्टम?
नेपाल सरकार ने "टेम्परेरी इम्पोर्ट ऑफ व्हीकल (TIV)" नाम से नया ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया है। इसके तहत भारत से नेपाल जाने वाली गाड़ियों को सीमा पार करने से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है। वाहन की जानकारी भरने के बाद कस्टम टैक्स ऑनलाइन जमा किया जाता है। इसके बाद एक QR कोड जारी होता है, जिसे सीमा पर दिखाने के बाद एंट्री मिलती है। सरकार का कहना है कि इससे कागजी काम कम होगा और प्रक्रिया ज्यादा डिजिटल और पारदर्शी बनेगी।
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सीमा पर क्यों लग रही हैं लंबी लाइनें?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद महोत्तरी जिले के जलेश्वर स्थित मालीवाड़ा-भिट्ठामोड़ कस्टम पोस्ट पर लोगों को काफी परेशानी हो रही है। कई यात्रियों और ड्राइवरों को 3 से 4 घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने में समय लग रहा है और मौके पर पर्याप्त स्टाफ भी उपलब्ध नहीं है। सिस्टम नया होने के कारण कई लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं, जिससे सीमा पर वाहनों की भीड़ बढ़ती जा रही है।
तकनीकी मदद की कमी बनी बड़ी समस्या
यात्रियों का कहना है कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया उनके लिए आसान नहीं है। कई लोगों को वेबसाइट या ऑनलाइन फॉर्म भरने की जानकारी नहीं है। कस्टम कार्यालय में भी पर्याप्त हेल्प डेस्क या गाइडेंस की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लोगों को खुद ही जानकारी जुटानी पड़ रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले यात्रियों को ज्यादा परेशानी हो रही है, क्योंकि वे डिजिटल प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं हैं।
दलालों की बढ़ी कमाई, लोगों पर अतिरिक्त बोझ
तकनीकी जानकारी और सहायता की कमी का फायदा दलाल उठा रहे हैं। सीमा क्षेत्र में कई लोग यात्रियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर 200 से 500 रुपये तक वसूल रहे हैं। जल्दी काम कराने की मजबूरी में लोग भी उनकी मदद लेने को तैयार हो जाते हैं। यात्रियों का कहना है कि अगर सरकारी सहायता केंद्र ठीक से काम करें और प्रक्रिया को आसान बनाया जाए, तो उन्हें अतिरिक्त पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे।
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सरकार ने माना, शुरुआती दौर में हैं दिक्कतें
कस्टम कार्यालय के प्रमुख राजेन्द्र बस्नेत ने स्वीकार किया है कि नई व्यवस्था के शुरुआती चरण में कुछ समस्याएं सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। स्थानीय व्यापारी और यात्री भी डिजिटल सिस्टम का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि इसे लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी, जागरूकता अभियान और तकनीकी सहायता की व्यवस्था होनी चाहिए थी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इन समस्याओं को कितनी जल्दी दूर कर पाती है।












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