'Ladki Bahin Yojna से 1.25 करोड़ महिलाएं बाहर', सुप्रिया सुले ने लगाए गंभीर आरोप, शेयर किए आंकड़ें

Ladki Bahin Yojna: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाडकी बहीण योजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने दावा किया है कि योजना के तहत लाभ पाने वाली 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को अपात्र घोषित कर दिया गया है। उन्होंने सरकार पर योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

सुले ने पोर्टल के आंकड़ों पर उठाए सवाल

सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयान में योजना के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों का हवाला दिया। उनके मुताबिक पोर्टल पर कुल आवेदन 1.12 करोड़ और स्वीकृत आवेदन केवल 1.06 करोड़ दिखाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि दिसंबर 2024 में घोषित 2.38 करोड़ लाभार्थियों के आंकड़े को आधार माना जाए तो 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया गया है।

Ladki Bahin Yojna

सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

सुले ने सरकार से पूछा कि यदि वर्तमान में 1.66 से 1.68 करोड़ महिलाओं को लाभ दिया जा रहा है तो पोर्टल पर इससे काफी कम आंकड़े क्यों दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि शुरुआत में घोषित लाभार्थी कौन थे और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को अपात्र क्यों ठहराया गया।

'क्या अपात्रों को बांटा गया जनता का पैसा?'

सांसद ने कहा कि यह योजना करदाताओं के पैसे से संचालित होती है, इसलिए यह जानना जरूरी है कि क्या पिछले डेढ़ वर्ष से अपात्र लोगों को सरकारी धन वितरित किया जाता रहा। उन्होंने इसे सरकार की गंभीर प्रशासनिक विफलता बताते हुए स्वतंत्र वित्तीय और प्रशासनिक ऑडिट कराने की मांग की।

पात्र महिलाओं को लाभ से वंचित न करने की मांग

सुप्रिया सुले ने कहा कि राज्य की प्रत्येक पात्र महिला को लाडकी बहीण योजना का लाभ नियमित रूप से मिलना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि e-KYC की समय-सीमा और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण किसी भी पात्र महिला को योजना से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है।

Ladki Bahin Yojna क्‍या है?

मुख्यमंत्री लाडकी बहीण योजना का उद्देश्य राज्य के उन परिवारों की महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। योजना के तहत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने 1500 रुपये सीधे जमा किए जाते हैं। राज्य सरकार ने दिसंबर 2024 तक 2.38 करोड़ महिलाओं को लाभ देने और 17,505 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित करने का दावा किया था।

e-KYC के बाद लगातार घटी लाभार्थियों की संख्या

सरकारी आंकड़ों के अनुसार योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 2.46 से 2.48 करोड़ तक पहुंच गई थी। हालांकि e-KYC प्रक्रिया अनिवार्य किए जाने के बाद लाभार्थियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई। मीडिया रिपोर्ट्स में पहले करीब 80 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई थी, जबकि अब लाभार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1.66 करोड़ रह जाने की बात कही जा रही है।

योजना की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

लाडकी बहीण योजना को लेकर सामने आए विरोधाभासी आंकड़ों ने योजना की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें राज्य सरकार के जवाब और संभावित जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक लाभार्थियों की संख्या क्या है और योजना के क्रियान्वयन में कहीं कोई बड़ी गड़बड़ी तो नहीं हुई।

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