पंजाब में ज़्यादातर मतदाता ने किस मुद्दे पर किया वोट, क्या आम आदमी पार्टी रचेगी इतिहास ?
पंजाब में रविवार के दिन मतदाताओं में काफ़ी उत्साह देखा गया, चुनाव आयोग के जारी आंकड़े के मताबिक इस बार 66.45 फ़ीसदी मतदान हुए।
चंडीगढ़, 21 फ़रवरी 2022। पंजाब में रविवार के दिन मतदाताओं में काफ़ी उत्साह देखा गया, चुनाव आयोग के जारी आंकड़े के मताबिक इस बार 66.45 फ़ीसदी मतदान हुए। इस बार के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने कई मुद्दों को ज़ेहन में रखते हुए मतदान किया। कांग्रेस के लिए इस बार का चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है। चरणजीत सिंह चन्नी के बतौर मुख्यमंत्री 111 दिनों के कार्यकाल पर कांग्रेस ने मतदाताओं से वोटिंग की अपील की। वहीं आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की तर्ज़ पर विकास का दावा करते हुए मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की। इसके साथ ही शिरोमणि अकाली दल ने पंजाबियत के मुद्दे पर ज़ोर देते हुए अकाली दल के लिए वोट मांगा। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा और शिअद (संयुक्त) गठबंधन के साथ पंजाब के विकास का दावा किया। इन सब मुद्दों के देखते हुए सबसे अहम सवाल है यह कि पंजाब में सत्ता का ताज किस दल के सिर सजेगा ?

दावं पर लगी दिग्गज़ों की क़िस्मत
आम आदमी पार्टी ने भगवंत मान को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है, वही कांग्रेस पार्टी ने चरणजीत सिंह चन्नी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। शिअद-बसपा गठबंधन की तरफ़ से सुखबीर सिंह बादल मुख्यमंत्री उम्मीदवार हैं। इसके अलावा भाजपा गठबंधन की तरफ़ से किसी को भी मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है लेकिन क़यास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा गठबंधन के जीत दर्ज करने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद का दावेदार बनाया जा सकता है। इन सब के बीच बिक्रम सिंह मजीठिया के बयान से भी सियासी पारा चढ़ा हुआ है। उन्होंने पिछले दिनों यह बयान दिया था कि ज़रूरत पड़ी तो भाजपा के साथ फिर से गठबंधन कर सकते हैं। अगर भाजपा के साथ शिअद गठबंधन करती है तो फिर से मुख्यमंत्री पद के दावेदारी पर पेंच फंस सकता है। क्योंकि शिअद की तरफ़ से सुखबीर बादल सीएम उम्मीदवार होंगे यह घोषणा पहले हो चुकी है।

बिक्रम मजीठिया के बयान से गरमाई सियासत
भाजपा के साथ पंजाब लोक कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) पहले ही गठबंधन में चुनाव लड़ चुकी है। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह सीएम पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं, ऐसे में शिअद का भाजपा के साथ गठबंधन करने से मुख्यमंत्री पद की दावेदारी मामला अटक सकता है। सियासी जानकारों की मानें तो इस स्थिति में जिस पार्टी के पास ज़्यादा विधायकों का समर्थन होगा वही मुख्यमंत्री पद का दावेदार होगा। वहीं अब पंजाब में किस पार्टी के सिर सत्ता का ताज सजेगा इस मामले मे कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर कुमार विश्वास द्वारा लगाए गए आरोपों का 'आप' को कितना नुकसान हुआ यह तो चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल जानते हैं कि इस बार मतदाताओं ने किस मुद्दे पर मतदान किया है।

क्या आम आदमी पार्टी रचेगी इतिहास ?
वन इंडिया हिंदी के संवाददाता ने मतदान के दिन विभिन्न मतदान केंद्रों पर जाकर मतदाताओं के मूड को टटोलने की कोशिश की। मतदान कर वापस लौटे वोटर्स से जब यह सवाल किया गया कि किस मुद्दे पर आपने मतदान किया तो उनका जवाब था। पंजाब में नशा खोड़ी, बेरोज़गारी, स्वास्थ्य. शिक्षा और महंगाई के मुद्दे पर वोट किया है। वहीं कुछ मतदाताओं का कहना था कि एक बार मतदान करने से पांच सालों तक सरकार रहती है लेकिन बदलाव नहीं होता है। हमने अपनी जीवन में कई सरकारों के कार्यकाल को देखा है, सभी को मतदान किया लेकिन आज तक बदलाव नहीं हुए हैं। इस बार बदलाव की नियत से वोटिंग की है। मतदाताओं की मानें तो सौ में 85 फ़ीसदी मतदाताओं ने सभी पार्टी के कार्यकाल को देखा है, इस बार बदलाव के लिए वोटिंग की है। मतदाताओं से बात के आधार पर यह संकेत मिल रहे हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी इतिहास रच सकती है।
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