जालंधर से 24 साल बाद कांग्रेस का सफाया करने वाले AAP कैंडिडेट, जानिए कौन हैं सुशील रिंकू
पंजाब में जालंधर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में कांग्रेस को इस बार बड़ा झटका लगा है। सुशील रिंकू ने जालंधर उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को 57 हजार से भी अधिक मतों से हरा दिया।

हवा कब किस ओर बहने लगे इसका पता नहीं होता। कई बार तो बड़े बड़ों की भविष्यवाणियां फेल होती देखी गईं। पंजाब में लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में कांग्रेस के साथ भी इस बार कुछ ऐसा ही हुआ। जब सुशील रिंकू ने जालंधर उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को पटखनी दे दी।
जालंधर सीट सांसद संतोख सिंह चौधरी के निधन के बाद खाली हो गई थी। से सीट कांग्रेस के पास दो दशक से अधिक समय से कांग्रेस के पास थी। इससे पहले 1998 पहली बार किसी गैर कांग्रेसी ने इस सीट पर कब्ज किया था। उस वक्त इस सीट से जनता दल के इंदर कुमार जीते थे। जिसके बाद के चुनाव में लगातार जालंधर पर कांग्रेस जीतती रही।
1999 में कांग्रेस के बलबीर सिंह, 2004 में कांग्रेस के राणा गुरजीत सिंह, 2009 में कांग्रेस के मोहिंदर एसकेपी, 2014 और 2019 में कांग्रेस के संतोख सिंह चौधरी ने जालंधर लोक सीट पर जीत दर्ज की थी। जबकि अब 24 साल बाद यहां कांग्रेस के जीत का सिलसिला टूटा और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी सुशील रिंकू ने जीत दर्ज की। सुशील रिंकू ने 57 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की है।
कांग्रेस छोड़ AAP में शामिल हुए थे रिंकू
आम आदमी पार्टी को ये जीत सियासी समीकरण की वजह से मिला। सुशील रिंकू इससे पहले कांग्रेस में सक्रिय रहे। लेकिन इस बार उप चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़ आम आमदी पार्टी जॉइन कर ली थी। उनके सामने पूर्व सांसद संतोख चौधरी की पत्नी करमजीत कौर चुनावी मैदान में थीं। जबकि बीजेपी ने अकाली इंदर इकबाल अटवाल पर दांव लगाया था। शिअद-बसपा गठबंधन ने बंगा विधायक डॉ सुखविंदर कुमार सुखी को मैदान में उतारा था।
1990 में राजनीति की शुरुआत
सुशील कुमार रिंकू ने कांग्रेस से ही अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। वे कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं। जालंधर लोकसभा उपचुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और 'आप' जॉइन कर ली। वर्ष 1990 रिंकू के राजनीति के शुरुआती दिन थे। तब वे एनएसयूआई के सक्रिय सदस्य थे।
2006 में पार्षद बने रिंकू
वर्ष 1994 में सुशील रिंकू (Sushil Rinku) को डीएवी कॉलेज जालंधर में श्री गुरु रविदास की सांस्कृतिक सोसायटी के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। 2002 में उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान कार्यकर्ता के रूप में सक्रियता दिखाई। इस दौरान पार्टी आलाकमान की नजर उन पर पड़ी। वर्ष 2006 में निकाय चुनाव लड़े और 2500 वोटों जीत दर्ज कर पार्षद बने।












Click it and Unblock the Notifications