महिलाओं की सुरक्षा पर आया बड़ा फैसला: यूपी का 'सजा मॉडल' बना देश के लिए मिसाल, NCRB रिपोर्ट में हुआ खुलासा
NCRB 2024 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के मामले में उत्तर प्रदेश देश का नंबर वन राज्य बनकर उभरा है। यूपी में सजा की दर (कन्विकशन रेट) ऐतिहासिक 76.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति का ही नतीजा है कि राज्य ने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

उत्तर प्रदेश के इस शानदार प्रदर्शन की निर्भया केस की मशहूर वकील और समाज सुधारक सीमा कुशवाहा ने भी जमकर तारीफ की है। उन्होंने 'उत्तर प्रदेश मॉडल' को पूरे देश के लिए एक मिसाल बताया। NCRB के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीमा कुशवाहा ने कहा कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो यूपी जैसे बड़े और ज्यादा आबादी वाले राज्य में भी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यूपी ने त्वरित न्याय, प्रभावी कानून व्यवस्था और रिकॉर्ड स्तर पर सजा दिलाने के मामले में देश के सामने एक उदाहरण पेश किया है। उनके मुताबिक, अपराधियों को सजा दिलाने में यूपी ने न केवल बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसका अनुसरण दूसरे राज्यों को भी करना चाहिए।
कुशवाहा ने सुझाव दिया कि जिन राज्यों में सजा की दर कम है, उन्हें योगी सरकार की नीतियों को अपनाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से सिफारिश की कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट, डिजिटल फॉरेंसिक लैब और अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूटर) की क्षमता बढ़ाने जैसे कार्यक्रमों को पूरे देश में विस्तार दिया जाए।
उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए यूपी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। इनमें एंटी-रोमियो स्क्वाड का गठन, फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट की स्थापना, अभियोजन प्रणाली को मजबूत करना, पुलिस की जवाबदेही तय करना और अपराधियों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू करना शामिल है।
सीमा कुशवाहा ने कहा, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह साबित कर दिया है कि 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' का विजन सभी की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकता है।" उन्होंने आगे कहा कि जब अपराधियों को जल्द और निश्चित सजा मिलती है, तो समाज से डर और असुरक्षा की भावना कम होती है।
NCRB 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्रमुख राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सजा दिलाने की दर उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा है। अन्य राज्यों की स्थिति इसके मुकाबले काफी पीछे है:
* उत्तर प्रदेश - 76.6%
* तमिलनाडु - 23.4%
* पंजाब - 19.0%
* केरल - 17.0%
* तेलंगाना - 14.8%
* कर्नाटक - 4.8%
* पश्चिम बंगाल - 1.6%












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