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पंजाब: कांग्रेस आलाकमान से मुलाक़ात के बाद कैसे बदले जाखड़ के सुर ? जानिए क्या है मामला

पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र कांग्रेस आलाकमान पंजाब में संगठन को मज़ूत करने में जुटी हुई है। वहीं रूठने मनाने का सिलसिला भी जारी है। सुनील जाखड़ कांग्रेस आलाकमान से नाराज़ दिख रहे थे।

चंडीगढ़, सितंबर 24, 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र कांग्रेस आलाकमान पंजाब में संगठन को मज़बूत करने में जुटी हुई है। वहीं रूठने मनाने का सिलसिला भी जारी है। सुनील जाखड़ कांग्रेस आलाकमान से नाराज़ दिख रहे थे। सियासी गलियारों में यह हलचल थी की पंजाब कांग्रेस की प्रधानगी छीनने और फिर CM पद नहीं मिल पाने से सुनील जाखड़ आहत हैं। इसी बीच सुनील जाखड़ ने एक बार कांग्रेस नेताओं और पार्टी की मुख़ालफ़त करने वालों को सीख दी है। आलाकमान से मुलाक़ात के बाद जिस तरह सुनील जाखड़ ने ट्वीट के ज़रिये अपनी बात रखी, उससे ऐसा लग रहा है कि उनकी पार्टी हाईकमान से नाराजगी दूर हो चुकी है।

राहुल गांधी का साहसिक फ़ैसला

राहुल गांधी का साहसिक फ़ैसला

पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने नए सीएम के तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी को चुनने वाले राहुल गांधी के फ़ैसले को ''साहसिक फैसला'' बताया है। मुख्यमंत्री के तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी के चयन को लेकर पार्टी पर हमला करने वाले कांग्रेस के विरोधियों की निंदा भी की। जाखड़ ने ट्विटर के ज़रिए अपनी बात को शेयर करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री के रूप में चुनकर सामाजिक भेदभाव की बाधाओं को तोड़ा है। चन्नी अनुसूचति जाति से आने वाले पंजाब के पहले मुख्यमंत्री हैं। यह साहसिक फैसला सिख धर्म के मूल्यों में निहित है और यह न सिर्फ राजनीति बल्कि राज्य के सामाजिक ताना-बाना के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षण है।

आलाकमान से मुलाक़ात के बाद आया बयान

आलाकमान से मुलाक़ात के बाद आया बयान

ग़ौरतलब है कि सुनील जाखड़ का यह बयान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद आया है। दो दिन पहले जाखड़ दोनों नेताओं के साथ विमान से दिल्ली गए थे। कैप्ट अमरिंदर सिंह के अचानक सीएम पद से इस्तीफ़ा देने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। हिंदू समुदाय से आने वाले जाखड़ मुख्यमंत्री पद के लिये प्रमुख दावेदारों में से एक थे। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह लेने वालों में सुनील जाखड़ का नाम भी चर्चाओं में शामिल था। हालांकि, अंबिका सोनी समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने सुझाव दिया था कि मुख्यमंत्री के तौर पर एक सिख को नियुक्त किया जाना चाहिए। बाद में यह पता चला कि नाराज़गी की वजह से सुनील जाखड़ ने उपमुख्यमंत्री पद के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इन्हीं अटकलों के बीच उन्होंने ने ट्वीट किया था कि ''ऊंचे पदों पर बैठे छोटी सोच के लोग पंजाब को नस्ल/जाति/पहचान के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे थे।

जाखड़ को मिल सकता है कोई पद

जाखड़ को मिल सकता है कोई पद

पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने शुक्रवार को कहा कि यह ताना-बाना समाज के सभी वर्गों की आकांक्षाओं और चिंताओं का एक जटिल परस्पर जोड़ है। इसका हर वक्त राज धर्म के तौर पर सम्मान और पोषण किया जाना चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि वर्तमान में साफ तौर पर एक बार फिर पंजाबियत की परीक्षा लिए जाने का खतरा दिख रहा है क्योंकि विभाजनकारी ताकतें पहले से ही समाज को तोड़ने के लिए इस बदलाव को हथियार बना रही हैं। इस ख़तरे को दूर नहीं किया जा सकता है। पंजाब कांग्रेस के घमासान पर वीराम लगाने के लिए इस फ़ैसले को सही से दिशा में ले कर चलना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो जो मजबूत भाईचारा और सौहार्द परीक्षा की घड़ी में भी हमेशा से पंजाब का गौरव रहा है, वह 'शीशे के घर' की तरह बड़ी आसानी से चकनाचूर हो जाएगा। इसी बीच सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि सुनील जाखड़ को कोई पद दिया जा सकता है।यही वजह है कि आलाकमान से मुलाक़ात के बाद जाखड़ के सुर बदल गए हैं।


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