क्या कांग्रेस हाई कमान ने नवजोत सिंह सिद्धू के पर कतरने शुरू कर दिए हैं ?
चंडीगढ़, 12 दिसंबर: नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस ने जब से पंजाब के मामलों में अहमियत देनी शुरू की है पार्टी अंदर गलत वजहों से घमासान मचता रहा है। पहले अमरिंदर सिंह और सिद्धू की टकराव की वजह से पार्टी में दो फाड़ होने की नौबत आई तो उसके बाद मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को लेकर भी सिद्धू ने अपना ऐक्शन शुरू कर दिया। अब जब पार्टी आलाकमान ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ को फिर से थोड़ा भाव देना शुरू किया है, सिद्धू उनकी हैसियत भी घटाने में जुट गए थे। लेकिन, लगता है कि अब कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धू से कह दिया है कि बस अब और नहीं!

नवजोत सिद्धू ने खुद को बताया 'पॉवरलेस' प्रेसिडेंट
पंजाब के बाबा बकाला में आयोजित एक रैली के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने खुद को 'पॉवरलेस' प्रेसिडेंट बताया है। सिद्धू जैसे बड़बोले नेता का सार्वजनिक तौर पर ये कबूलनामा साफ इशारा कर रहा है कि पार्टी हाई कमान ने उनकी मनमर्जी पर मुहर लगाना बंद कर दिया है। सिद्धू ने रैली में कहा है, 'मैं सिर्फ एक अध्यक्ष हूं। मैं महासचिवों को नियुक्त करने में भी सक्षम नहीं हू।' सिद्धू की ओर से पार्टी में अपनी स्थिति के बारे में ये टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है, जब पार्टी हाई कमान ने उनकी ओर से दिए गए 22 जिला संयोजकों के नाम को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। सिद्धू ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ की ओर से नियुक्त पदाधिकारियों को हटाकर नए नामों की सिफारिश की थी।
Recommended Video

जिला संयोजकों की नियुक्ति में सिद्धू की नहीं चली!
पहले कांग्रेस नेतृत्व ने विभिन्न विधानसभा समितियों में सिद्धू को नजरअंदाज किया और अब उसने 22 जिला संयोजकों की लिस्ट जारी कर दी है। जानकारी के मुताबिक जिला संयोजकों की नियुक्ति सिद्धू की सलाह के बिना की गई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने मंगलवार को ही नए जिला संयोजकों की लिस्ट निकाली है और उन सबसे कहा है कि तत्काल प्रभाव से काम करना शुरू कर दें। नए जिला संयोजकों से कहा गया है कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और एमएलए के साथ तालमेल बिठाकर चुनाव के मद्देनजर पार्टी हित में काम करें। दरअसल, अपनी ओर से नियुक्त पार्टी के पदाधिकारियों को सिद्धू की ओर से हटाए जाने से सुनील जाखड़ की नाखुशी की बात कही जा रही थी और उन्होंने यह मुद्दा राहुल गांधी के सामने भी उठाया था। जाखड़ ने एक ट्वीट किया था, जिसमें लिखा था, 'जिसका बंदर, वही नचाए। मैं इसी सिद्धांत का पालन करता हूं- ना तो किसी को कुछ सलाह देता हूं और ना ही दूसरे के मामले में दखल देता हूं।'

कई सीटों पर टिकटों के लिए घमासान
इससे लगता है कि कांग्रेस आलाकमान की लाख कोशिशों के बावजूद पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। दो विधानसभा क्षेत्रों सुल्तानपुर लोधी और क्वादियान में आंतरिक गुटबाजी पहले ही सामने आ चुकी है। शनिवार को नवजोत सिंह सिद्धू ने सुल्तानपुर लोधी से पार्टी विधायक नवतेज सिंह चीमा की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। जहां से पूर्व कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्हें पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह का नजदीकी माना जाता है। इसी तरह क्वादियान सीट पर नवजोत सिंह सीटिंग एमएलए फतेह जंग बाजवा के लिए बैटिंग कर रहे हैं, जबकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा वहां से अपनी उम्मीदवारी चाह रहे हैं।












Click it and Unblock the Notifications