पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को सलाहकार नियुक्त करते ही मिला बड़ा झटका

आपको बता दें कि मोहम्मद मुस्तफ़ा जो 2017 चुनाव से पहले से ही सीएम अमरिंदर सिंह के क़रीबी अफ़सरों में शुमार किए जाते थे। पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफ़ा को यह लगता था कि कैप्टन की सरकार बन्ने पर वह डीजीपी बनाए जाएंगे।

चंडीगढ़, अगस्त 11, 2021। पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस को मज़ूती देने के लिए 11 अगस्त को अपने लिए चार सलाहकारों की नियुक्ति की थी। नियुक्ति के कुछ देर बाद ही पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष को उनके सलाहकार ने जोरदार झटका दे दिया। नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार के पद से पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा ने अपना नाम वापस ले लिया। ग़ौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच हुई मुलाक़ात के 1 दिन भी नहीं बीते थे नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने लिए चार सलाहकार नियुक्त कर लिए थे।

sidhu advisor post

नवजोत सिंह सिद्धू के चार सलाहकार नियुक्त किए जाने वाले फ़ैसले पर राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या नवजोत सिंह सिद्धू कैप्टन के सामने समानातर सरकार चलाना जा रहे हैं। अभी चर्चोओँ का दौर जारी ही था कि पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा ने नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार के पद से अपना नाम वापस ले लिया।पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू नियुक्त किए गए सलाहकारों में जिन चार लोगों का नाम शामिल किया गया उसमें पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा् का नाम प्रमुख था। पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को फोन कर के भी इस बात की जानकारी दे दी है। उन्होंने कहा कि मैं राजनीतिक पदों के लिए नहीं बना हूं। उन्होंने कहा कि मुझे ख़ुशी है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने मेरे बारे में सोचा।

आपको बता दें कि मोहम्मद मुस्तफ़ा जो 2017 चुनाव से पहले से ही सीएम अमरिंदर सिंह के क़रीबी अफ़सरों में शुमार किए जाते थे। पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफ़ा को यह लगता था कि उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनी तो कैप्टन उन्हें डीजीपी बनाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार जैसे बनी तो कैप्टन ने पूराने डीजीपी सुरेश अरोड़ा को ही डीजीपी के पद पर बने रहने दिया। जब सुरेश अरोड़ा रिटायर हो गए तो उनकी जगह पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिनकर गुप्ता को डीजीपी का पदभार दे दिया जो कि मुहम्मद मुस्तफ़ा से तजुर्बे में काफ़ी कम थे।

पंजाब सरकार की तरफ़ उस वक़्त डीजीपी बनाने के लिए जो पैनल भेजा गया था उसमें भी मोहम्मद मुस्तफ़ा का नाम नहीं था। इस बाबत मोहम्मद मुस्तफ़ा ने कैट और हाईकोर्ट में चुनौती भी दी थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस रवैय्ये से नाराज़ होकर मोहम्मद मुस्तफ़ा ने कैप्टन अमरिंदर के खेमे को छोड़ दिया और सिद्धू के खेमे चले गए। मोहम्मद मुस्तफ़ा की मंत्री पत्नी रजिया सुल्ताना भी कैप्टन के खेमे से किनारा कर सिद्धू के खेमे में मानी जा रही है।

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