पंजाब में कांग्रेस को लग सकता है बड़ा झटका, भाजपा में शामिल हो सकते हैं सांसद मनीष तिवारी
पंजाब कांग्रेस की मुश्किलें दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही हैं। हाल ही में कांग्रेस के पूर्व क़ानून मंत्री अश्वनि कुमार ने पार्टी का दामन छोड़ दिया।
चंडीगढ़, 18 फ़रवरी 2022। पंजाब कांग्रेस की मुश्किलें दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही हैं। हाल ही में कांग्रेस के पूर्व क़ानून मंत्री अश्वनि कुमार ने पार्टी का दामन छोड़ दिया। हालांकि अभी तक वह किसी भी सियासी दल में शामिल नहीं हुए हैं लेकिन पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बन रही है ऐसा बयान देते हुए नज़र आ रहे हैं। वहीं अब पंजाब के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि सांसद मनीष तिवारी कांग्रेस को अलविदा कह सकते हैं। वहीं मनीष तिवारी ने कहा है कि वह कांग्रेस नहीं छोड़ रहे है लेकिन पार्टी में लोकतांत्रिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। मनीष तिवारी के बयान के बाद भी चर्चाएं तेज़ हैं कि वह पार्टी छोड़ सकते हैं। सूत्रों ने इसके पीछ कई वजहों का हवाला दिया है।

'पार्टी में किराएदार नहीं हिस्सेदार हैं'
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने हाल ही में यह बयान दिया था कि वह पार्टी में किराएदार नहीं हिस्सेदार हैं। पिछले 40 सालों से कांग्रेस के लिए ज़मीनी तौर से मेहनत करते हुए आ रहे हैं वह पार्टी नहीं छोड़ेंगे लेकिन कोई धक्के मारकर बाहर निकाल दे तो ये अलग बात है। उन्होंने कहा कि विचारात्मक सियासत में यक़ीन रखते हुए हमने हमने परिवार और इस देश की अखंडता के लिये खून बहाया है। ग़ौरतलब है कि अश्वनि कुमार के पार्टी से इस्तीफ़ा देने के बाद अचानक से पूर्व विधायक केवल सिंह ढिल्लों के पार्टी से निष्कासित करने के बाद कांग्रेस मे फिर से गुटबाज़ी को हवा मिल गई है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराज़गी देखी जा रही है। सांसद मनीष तिवारी ने भी केवल सिंह ढिल्लों को निकाले जाने वाले मामले को हैरत अंगेज़ बताया है। उन्होंने केवल सिंह ढिल्लों की तारीफ़ करते हुए ट्वीटर पर पोस्ट भी किया है।

पंजाब में बढ़ी सियासी सरगर्मियां
सांसद मनीष तिवारी के पूर्व विधायक केवल सिंह ढिल्लों की वक़ालत करने के बाद फिर से सियासी सरगर्मियां बढ़ गईं हैं। सूत्रों की मानें तो भाजपा के वरीष्ठ नेताओं ने मनीष तिवारी को साधने की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। इसके साथ ही मनीष तिवारी के संमर्थक और कार्यकर्ता भी उन पर पार्टी छोड़ने का दवाब बना रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि कांग्रेस आपको बेइज़्ज़त कर के निकाले इससे अच्छा है आप पहले ही सम्मान के साथ दूसरी सियासी पार्टियों का दामन थाम लें। हालांकि मनीष तिवारी लगातार कांग्रेस पार्टी में ही रहने की बात दोहरा रहे हैं लेकिन कार्यकर्ता लगातार उन्हें दल बदलने की सलाह दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि कांग्रेस में कुर्सी की लड़ाई की वजह से योग्य नेताओं को आलाकमान नज़र अंदाज कर देती है। इससे अच्छा है कि दल बदल कर सम्मानजनक पद हासिल कर अपनी सियासी ज़मीन मज़बूत करें।
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111 दिनों में नहीं बल्कि पूरे 5 साल में काम हुए- मनीष
पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र कांग्रेस आलाकमान ने स्टार प्रचारकों की सूची में भी सांसद मनीष तिवारी को जगह नहीं दी। इस बात से भी उनके समर्थक और कार्यकर्ता नाराज़ चल रहे हैं और मनीष तिवारी को दल बदलने की सलाह दे रहे हैं। स्टार प्रचारकों की सूची में नाम शामिल नहीं होने पर मनीष तिवारी नाराज़गी जाहिर की थी। उन्होंने ने कहा था मुझे हैरानी नहीं होती अगर अगर लिस्ट में मेरा नाम होता। स्टार प्रचारकों की सूची में ऐसे नेताओं को जगह दी गई है जिनके कहने पर उनकी पत्नी तक मतदान नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चन्नी के 111 दिनों के कार्यकाल पर वोट मांग रही है जबकि काम 111 दिनों में नहीं बल्कि पूरे पांच सालों में हुए हैं। इसके साथ ही मनीष तिवारी ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ उनके निजी संबंध हैं। कैप्टन पहले भी उनके दोस्त थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे।
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