पंजाब: सीएम चन्नी और सिद्धू को UPSC ने दिया झटका, जानिए उनके चहेते DGP की रेस से क्यों हुए बाहर ?

पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस में सियासी संग्रास छिडा ही हुआ था कि यूपीएससी ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को गहरा झटका दिया है।

चंडीगढ़, 5 जनवरी 2022। पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस में सियासी संग्रास छिडा ही हुआ था कि यूपीएससी ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को गहरा झटका दिया है। यूपीएससी ने सिद्धू की पसंद सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय और सीएम चन्नी के क़रीबी इकबाल प्रीत सिंह सहोता का नाम डीजीपी की सूची से बाहर कर दिया है। यूपीएससी की तरफ़ से दिए गए तीन नामों में से किसी एक नाम को सीएम चन्नी को डीजीपी पद के लिए चुनना होगा। पंजाब सरकार ने सिद्धार्थे चट्टोपाध्याय को डीजीपी बनाए जाने की सिफारिश की थी, लेकिन संघ लोक सेवा आयोग इस फ़ैसले पर असहमति दर्ज करते हुए नए नामों का सुझाव दिया है।

30 सितंबर को भेजी गई UPSC को सूची

30 सितंबर को भेजी गई UPSC को सूची

पंजाब सरकार ने यूपीएससी को 30 सितंबर को ही सूची भेज दी गई थी। लेकिन 5 अक्टूबर को डीजीपी का पद खाली हुआ था। जानकारों की मानें तो परमानेंट डीजीपी के लिए कम से कम 6 महीने का कार्यकाल बचा होना चाहिए। पंजाब के डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय 31 मार्च 2021 को सेवा मुक्त होने वाले हैं। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले परमानेंट डीजीपी लगना तय माना जा रहा है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान की वजह से पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था। इसके बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जिसके बाद कैप्टन के क़रीब़ी रहे डीजीपी दिनकर गुप्ता छुट्टी पर चले गए। यह भी माना जा रहा था कि वह (दिनकर गुप्ता) कैप्टन के क़रीबी हैं इसलिए उन्हें डीजीपी पद से हटा दिया जाएगा और ऐसा ही हुआ।

5 अक्टूबर को खाली हुआ था DGP पद

5 अक्टूबर को खाली हुआ था DGP पद

चरणजीत सिंह चन्नी ने जब पंजाब के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उसके बाद 30 सितंबर को यूपीएससी को अफसरों की लिस्ट भेजी गई। पंजाब सरकार ने दिनकर गुप्ता को हटाया और 5 अक्टूबर को डीजीपी पद खाली हुआ। इकबाल प्रीत सिंह सहोता ने डीजीपी पद का कार्यभार संभाला। लेकिन पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू शुरू से ही इसके विरोध में थे और उन्हें हटाकर सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को कार्यकारी डीजीपी बनाया गया, 31 मार्च 2022 को सेवामुक्त होने वाले हैं। लेकिन परमानेंट डीजीपी के पद पर तैनात होने के लिए कम से कम छह महीने का कार्यकाल बचा होना चाहिए। चूंकि 5 अक्टूबर से डीजीपी का पद खाली हुआ था तो 31 मार्च 2022 तक 6 महीने का कार्यकाल पूरा नहीं हो पा रहा है। इसलिए सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय रेस से बाहर हो गए हैं।

UPSC ने तैयार की नामों की सूची तैयार

UPSC ने तैयार की नामों की सूची तैयार

इकबाल प्रीत सहोता का नाम भी डीजीपी की सूची में शामिल नहीं किया गया है। इस मामले के जानकारों की मानें तो इकबाल प्रीत सहोता को पंजाब का डीजीपी बनाया गया उसके बाद फिर विवादों के चलते पद से हटाया गया। अब फिर से सूची में सहोता का नाम इसलिए नहीं डाला गया क्योंकि अगर दोबारा से उनकी नियुक्ति हुई तो यूपीएससी की क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठेंगे। अगर उन्हों ही डीजीपी बनाना था तो फिर पद से हटाया क्यों गया था। इसलिए सहोता भी डीजीपी की रेस से बाहर हो गए हैं। यूपीएससी ने 1987 बैच के अधिकारियों दिनकर गुप्ता, वीके भावरा और 1988 बैच के प्रबोध कुमार का नाम राज्य में शीर्ष पुलिस पद के लिए पैनल में शामिल किया है।


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