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पंजाब: कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने के बाद से ही ढीली हो गई कैप्टन अमरिंदर सिंह की सियासी पकड़, जानिए कैसे ?

वहीं पटियाला में जिस तरह से कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी मेयर संजीव शर्मा उर्फ बिट्टू को शिकस्त का सामना करना पड़ा इससे लग रहा है, कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की सियासी पकड़ ढीली हो चुकी है।

चंडीगढ़,26 नवम्बर 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र कैप्टन अमरिंदर सिंह रणनीति तैयार कांग्रेस को मात देने के लिए सियासी पकड़ मज़बूत करने में जुटे हुए हैं, लेकिन जिस तरह से उन्हें अपने ही गढ़ बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह की बयानबाज़ी से यह क़यास लगाए जा रहे थे कि विधानसभा चुनाव में कैप्टन पंजाब कांग्रेस को जबरदस्त टक्कर दे सकते हैं। वहीं पटियाला में जिस तरह से कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी मेयर संजीव शर्मा उर्फ बिट्टू को शिकस्त का सामना करना पड़ा इससे लग रहा है, कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की सियासी पकड़ ढीली हो चुकी है।

कैप्टन के करीबी की हार

कैप्टन के करीबी की हार

पंजाब की सियासत में कैप्टन ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पटियाला में अपने क़रीबी संजीव शर्मा उर्फ़ बिट्टू को नहीं जीत नहीं दिला सके। हालांकि ये माना जाता है कि पटियाला में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सियासी ज़मीन काफ़ी मजबूत है। लेकिन जिस तरह से उनके क़रीबी संजीव शर्मा को हार मिली उसके बाद से चर्चाओं का बाज़ार गर्म है कि कैप्टन का वजूद कांग्रेस में रहने की वजह से था, कैप्टन के कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने के बाद से ही उनका राजनीति में दबदबा फीका पड़ गया है। यह भी कहा जा रहा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर अपनी राजनीति चमकाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि अगर कैप्टन पंजाब के चुनावी रण में अकेले उतरेंगे तो जिस तरह से उन्हें अपने ही गढ़ में हार का सामना करना पड़ा है वैसे ही विधानसभा चुनाव में भी उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी।

 बिट्टू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

बिट्टू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

पटियाला निगम हाउस ने संजीव शर्मा उर्फ बिट्टू को संस्पेंड कर दिया क्योंकि बिट्टू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। उनके मेयर पद पर पिछले कई दिनों से तलवार लटक रही थी। उन्हें मेयर के पद पर बने रहने के लिए 31 वोट चाहिए थे, लेकिन उन्हें सिर्फ़ 25 वोट ही मिले।वह जरूरी मत हासिल करने से चूक गए। लोकल अथॉरिटी की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। बिट्टू को समर्थन दिलाने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद निगम ऑफिस पहुंचे थे,लेकिन अमरिंदर सिंह बिट्टू को जरूरी समर्थन दिलाने में नाकाम रहे। इस दौरान निगम के ऑफिस में हाई प्रोफाइल ड्रामा भी देखने को मिला।

BJP के साथ गठबंधन की ख्वाहिश

BJP के साथ गठबंधन की ख्वाहिश

संजीव शर्मा बिट्टू ने चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार पर पुलिस का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगाए। अमरिंदर सिंह के लिए भी निगम ऑफिस में पहुंचने की राह आसान नहीं रही और उन्हें गेट पर करीब 10 मिनट इंतजार करना पड़ा। बता दें कि जिस वक्त निगम के मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। उसी दौरान पुलिस ने निगम के ऑफिस के बाहर तैनाती बढ़ाने के साथ ही निगम ऑफिस से 100 मीटर की दूरी पर ही गाड़ियों को रोका जा रहा था। गौरतलब है कि हाल ही में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर अपनी सियासी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बनाने का एलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के साथ सीट गठबंधन कर चुनाव लड़ने की ख्वाहिशा का इज़हार भी किया है।


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