पंजाब में सियासी ज़मीन मज़बूत करने के लिए BJP का नया दांव, जीवन गुप्ता ने PM मोदी से ये अपील
पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी सियासी पार्टियां चुनावी तैयारियां कर रही हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी अपनी सियासी पकड़ बनाने में नाकाम साबित हो रही है।
चंडीगढ़, 16 नवम्बर 2021। पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी सियासी पार्टियां चुनावी तैयारियां कर रही हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी अपनी सियासी पकड़ बनाने में नाकाम साबित हो रही है। इसलिए अब सिख समुदाय को लुभाने और नेहरू विरोधी छवी को बरकरार रखने के लिए भाजपा पंजाब ने नया दांव खेला है। भारतीय जनता पार्टी पंजाब के महासचिव जीवन गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 14 नवंबर को देश में मनाए जाने वाले 'बाल दिवस' की तारीख बदलने की अपील की है। पीएम मोदी को लिखी गई चिट्ठू में जीवन गुप्ता ने कहा कि सिखों के दसवें गुरु-गुरु गोबिंद सिंह के दो बेटों की शहादत दिवस के मौके पर बाल दिवस मनाया जाना चाहिए।

PM मोदी से की अपील
भारतीय जनता पार्टी पंजाब के महासचिव जीवन गुप्ता ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के दो बेटों जोरावर सिंह और फतेह सिंह के शहादत दिवस पर बाल दिवस मनाना उनके प्रती सच्ची श्रद्धांजिल होगी, जिन्हें मुगल बादशाह औरंगजेब के शासन के दौरान पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया था। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के दो बेटों की शहादत को याद करने के लिए हर साल 25 दिसंबर से फतेहगढ़ साहिब में तीन दिवसीय शहीदी जोर मेला का आयोजन किया जाता है। जीवन गुप्ता ने कहा कि बाल दिवस देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर 14 नवंबर को मनाया जाता है। 1964 से 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है जबकि उससे पहले इसके लिए 20 नवंबर की तारीख तय थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की मौत के बाद जबरन तारीख बदली। इसलिए जीवन गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी से बाल दिवस की तारीख बदलने की अपील की है।

BJP की सियासी पकड़ कमजोर
भारतीय जनता पार्टी पंजाब के अलावा सभी राज्यों में चुनावी अभियान जोरों से कर रही है। लेकिन पंजाब में भारतीय जनता पार्टी अपनी चुनावी रणनीति तय करने में विफल साबित हो रही है। भाजपा आलाकमान भी पंजाब में सियासी ज़मीन मजबूत करने के लिए कोई खास कदम उठाते हुए नहीं दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी दूसरे राज्यों में तो सरकार बनाने का दावा करते हुए नज़र आ रही है, लेकिन पंजाब में शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद भारतीय जनता पार्टी की पकड़ धीरे-धीरे कमज़ोर ही होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी इससे पहले पंजाब के चुनावों में शिरोमणि अकाली दल के साथ मिलकर ही चुनाव लड़ा जिसमें अकाली दल की भूमिका अहम रहती थी।

117 सीटों पर चुनाव लड़ रही भाजपा
शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन की वजह से कभी भी भारतीय जनता पार्टी को पूरे पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने का मौक़ा नहीं मिला। भाजपा इस बार शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में नहीं है इसलिए भाजपा सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी तो कर रही है, लेकिन कांग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी के त्रिकोणीय मुकाबले में अभी भी भाजपा खुद के के लिए कोई जगह नहीं बना पा रही है। सियासी गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि पंजाब में भाजपा सियासी पकड़ बनाने में कामयाब नहीं हो पाएगी। पार्टी आलाकमान के पास यह रिपोर्ट भी जा चुकी है। अब पंजाब में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी आलाकमान क्या नई रणनीति तैयार करता है उस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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