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पंजाब: CM चन्नी के सामने बड़ी चुनौती, 90 दिनों में इन बड़े मुद्दों का निकालना होगा हल, पढ़िए पूरी ख़बर

विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र पंजाब में सियासी सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं । सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं। पंजाब की सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

चंडीगढ़, सितंबर 28, 2021। विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र पंजाब में सियासी सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं । सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं। पंजाब की सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना कर अंदरूनी कलह पर वीराम तो लगा दिया लेकिन नवनियुक्त सीएम चन्नी के सामने बड़ी चुनौती आ गई है। पंजाब सरकार का कार्यकाल पूरा होने वाला है और चरणजीत सिंह चन्नी की नई टीम के पास सिर्फ़ 90 दिन का ही वक्त बचा है। इसके बाद किसी वक़्त आचार संहिता लागू हो सकती है। चरणजीत सिंह चन्नी की टीम के सामने यह बड़ी चुनौती है कि उन मुद्दों पर काम करके परिणाम जनता के साथ जनता के बीच जाना जिसे लेकर वह कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधते रहे हैं।

पंजाब के तीन बड़े मुद्दे

पंजाब के तीन बड़े मुद्दे

पंजाब की जनता तीन बड़े मुद्दे के हल का बेसब्री से इंतजार कर रही है, जिसमें ड्रग, बेअदबी और बिजली समझौते हैं। इन्हीं तीन मुद्दों पर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और परगट सिंह अकसर कैप्टन अमरिंदर सिंह को घेरते नज़र आते थे। वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू तो यहां तक दावा किया था कि पहली कैबिनेट में ही ड्रग्स, बेअदबी और बिजली समझौते के मुद्दे का हल निकाल देंगे। नवजोत सिंह सिद्धू के क़रीबी परगट सिंह वही विधायक हैं जिन्होंने कैप्टन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। अब परगट सिंह पंजाब सरकार में मंत्री भी हैं। उनके पास विभाग की ज़िम्मेदारी भी है। वहीं उनकी टवीट् की जवाबदेही भी है जिनके ज़रिए वह लगातार कैप्टन सरकार के खिलाफ हमलावर रहे हैं।

परगट सिंह ने उठाए थे मुद्दे

परगट सिंह ने उठाए थे मुद्दे

परगट सिंह अकसर मीडिया से मुखातिब होते हुए यह कहते नज़र आते थे कि करीब ढाई साल से लगातार कैप्टन अमरिंदर सिंह को चिट्ठी लिखते रहे। पंजाब में बड़े ड्रग्स तस्करों पर कार्रवाई नहीं होने और बेअदबी मामलों में इंसाफ नहीं मिलने का मुद्दा हर बार कैप्टन के सामने उठाते रहे। उनकी चिट्ठियों में इन्हीं बातों पर ज़ोर रहता था कि इन मुद्दों पर कार्रवाई की जाए। आपको बता दें कि पिछले चुनावी घोषणा पत्र में कांग्रेस ने वादा किया था कि अगर उनकी सरकार बनती है तो हेलीकॉप्टर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा इसके साथ ही वीआईपी कल्चर खत्म होगा, लेकिन पिछले साढ़े चार सालों में कांग्रेस वीआईपी कल्चर को खत्म नहीं कर पाई है।

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    चन्नी सरकार के लिए बड़ी चुनौती

    चन्नी सरकार के लिए बड़ी चुनौती

    कांग्रेस पार्टी ने बेघर और ग़रीब लोगों के लिए पांच रुपये में खाना रेडक्रॉस सोसाइटी की तरफ से दिए जाने का भी वादा किया था को कि अभी भी अधर में है। वहीं किसानों के क़र्ज़ माफ़ी का बड़ा वादा भी अधर में है। काफी किसान अब भी कर्ज के बोझ में दबे हैं। बिजली 5 रुपये प्रति यूनिट, 2500 रुपये बेरोजगारी भत्ते के वादे भी चन्नी सरकार को पूरे करने होंगे। 2017 में कैप्टन ने गुटका साहिब की सौगंध खाकर कहा था कि वह चार सप्ताह में नशे का सफाया कर देंगे। नशे का सफ़ाया तो नहीं हो पाया उल्टे ही पंजाब में नशे की जड़ें और ज़्यादा मजबूत हो चुकी हैं। घर-घर रोजगार के तहत परिवार के कम से कम एक सदस्य को नौकरी मुहैया करवाने का वादा था। वह वादा भी पूरा नहीं किया गया है जिससे युवाओं में सरकार के ख़िलाफ़ काफ़ी नाराज़गी है। इन सभी वादों को पूरा करने के साथ-साथ 2017 के चुनावी घोषणा पत्र को पूरा करने की ज़िम्मेदारी भी चन्नी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।


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