पंजाब:लहरा विधानसभा से कांग्रेस उम्मीदवार का पलड़ा क्यों है भारी, जानिए कैसा रहा है सियासी समीकरण ?
पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियां ज़ोरों पर चल रही है, 20 तारीख़ को सभी 117 विधानसभा सीटों पर मतदान होने जा रहा है। विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र लहरा विधानसभा सीट पर भी सभी दलों की निगाहें हैं।
चंडीगढ़, 15 फरवरी 2022। पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियां ज़ोरों पर चल रही है, 20 तारीख़ को सभी 117 विधानसभा सीटों पर मतदान होने जा रहा है। विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र लहरा विधानसभा सीट पर भी सभी दलों की निगाहें हैं। इस विधानसभआ सीट पर काफ़ी वक्त से कांग्रेस का क़ब्ज़ा रहा है, यहां से कांग्रेस की नेत्री राजिंदर कौर भट्टल अपनी पार्टी का परचम बुलंद करती आ रही हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस के पाले से शिरोमणि अकाली दल के पाले में चली गई थी। लहरा विधानसभा सीट संगरूर जिले में आती है यहां के सासंद आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान हैं। ग़ौरतलब है कि भगवंत मान आम आदमी पार्टी की तरफ़ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी हैं।

चुनवी मैदान में किस पार्टी से कौन हैं उम्मीदवार ?
लहरा सीट से इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर राजिंदर कौर भट्टल चुनाव लड़ी रही है। वहीं आम आदमी पार्टी की तरफ़ से बरिंदर कुमार गोयल चुनावी बिगुल फूंक रहे हैं। इसके साथ ही शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर गोबिंद सिंह लोगोवाल चुनाव लड़ रह हैं। शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) की टिकट पर परमिंदर सिंह ढिंढसा चुनावी मैदान में उतरे हैं। आपको बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजिंदर कौर भट्टल को शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी परमिंदर सिंह ने हराया था। लहरा विधानसभा सीट पर 1992 से लगातार कांग्रेस ने जीत रही थी लेकिन 2017 के चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था।

2017 में शिअद ने जमाया था क़ब्ज़ा
पंजाब में लहरा विधानसभा सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव नतीजे की बात की जाए तो शिरमोणि अकाली दल के उम्मीदवार परमिंदर सिंह ढींढसा ने 65 हज़ार 550 वोट हासिल कर कांग्रेस प्रत्याशी राजिंदर कौर भट्टल को हराया था। ग़ौरतलब है कि राजिंदर कौर भट्टल पांच बार विधायक रहने के बावजूद 38 हज़ार 735 वोटों से दूसरे नंबर रहीं थीं। पहली बार 1985 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल ने जीत दर्ज की थी। दूसरी बार 2017 के विधानसभा चुनाव में शिअद ने जीत दर्ज की। इस बार शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी परमिंदर सिंह ढींढसा ने कांग्रेस की उम्मीदवार राजिंदर कौर भट्टल को 26 हज़ार 815 वोटों के मार्जिन से हराया था। इस सीट पर 1992 से लगातार राजिंदर कौर भट्टल ही जीत दर्ज करते आ रही हैं। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जीत पर ब्रेक लग गया था।

1992 में पहली बार चुनाव जीती थीं भट्टल
कांग्रेस उम्मीदवार राजिंदर कौर भट्टल ने पहली बार 1992 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बरिंदर कुमार को मात देकर जीत दर्ज की थी। 1992 में राजिंदर कौर भट्टल ने भाजपा प्रत्याशी बरिंदर कुमार को 10 हज़ार 665 मतों से हराया था। इसके बाद वह 1997,2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में लगातर जीत दर्ज करते हुए आ रही हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 44 हज़ार 706 वोटों से जीत दर्ज की थी। उन्होंेने शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार सुखवंत सिंह को 3 हज़ार 355 मतों से हराया था। सुखवंत सिंह को 41 हज़ार 351 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा था।

कांग्रेस को हो सकता है फ़ायदा
कांग्रेस आलाकमान ने सियासी समीकरण को देखते हुए इस बार भी अपनी पुरानी नेत्री राजिंदर कौर भट्टल को ही लहरा सीट से उम्मीदवार घोषित किया है। ग़ौरतलब है कि राजिंदर कौर भट्टल 1985 से लगातार चुनावी दांव आज़माती रही हैं। सियासी जानकारों की मानें तो कांग्रेस इस बार लहरा विधानसभा सीट पर क़ब्ज़ा जमा सकती है। क्योंकि इस सीट से शिरोमणि अकाली दल सिर्फ़ दो बार ही जीती है। ज्यादातर कांग्रेस का ही क़ब्ज़ा रहा है, इस बार भाजपा और गठबंधन साथी की तरफ़ से शिरोणि अकाली दल सयुक्त ने परमिंदर सिंह ढिंढसा चुनावी मैदान में उतारा है। इस बार शिरोमणि अकाली दल संयुक्त की वजह से शिअद के वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है और इसका सीधा फ़ायदा कांग्रेस को पहुंचेगा क्योंकि कांग्रेस ने लगातार पांच बार विधायक रह चुकीं राजिंदर कौर भट्टल को चुनावी समर में उतारा है।
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