Assam Election में भाजपा की जीत की हैट्रिक, 5 वजहें जिसने दिलाई बिस्वा सरकार को प्रचंड जीत?
Assam Election Results 2026: असम विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जीत दिलाई है। 4 मई को मिली यह शानदार विजय उनके राजनीतिक सफर का शानदार तोहफा बन गई। अपने नेतृत्व में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ते हुए, सरमा ने भाजपा को प्रचंड बहुमत दिलाया, जिससे उनका राष्ट्रीय कद भी बढ़ा है।
126 विधानसभा सीटों वाले असम राज्य में भाजपा अपने दम पर सरकार बनाने जा रही है। यह महज चुनावी विजय नहीं, बल्कि असम की राजनीति में एक मजबूत होते राजनीतिक मॉडल पर मुहर है।

बिस्वा ने लगातार छठीं बार जीत हासिल की
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जालुकबारी सीट से रिकॉर्ड लगातार छठी बार जीत हासिल की, जिसमें उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को 89,434 वोटों के भारी अंतर से हराया। जीत के बाद उन्होंने जनता को धन्यवाद दिया और "अच्छे हिंदू कांग्रेस नेताओं" से राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने और "बांग्लादेशी मियाओं के आक्रमण" से लड़ने के लिए भाजपा में शामिल होने का आग्रह किया। आइए जानते हैं पांच वजहें जिसकी वजह से असम में भाजपा ने लगाई जीत की हैट्रिक...
सरमा कैसे बनें असम की जनता के फेवरेट?
सरमा की इस विशाल जीत के पीछे पहचान की राजनीति, कल्याणकारी योजनाएं, सुशासन और चुनावी रणनीति का एक सफल मिश्रण रहा। उन्होंने 'अवैध अप्रवासन' के मुद्दे को फिर से उभारा, जो असम की राजनीति की सबसे पुरानी चिंता रही है। बांग्लादेश सीमा से होने वाले अवैध घुसपैठ को मूल असमिया लोगों के लिए खतरा बताते हुए, उन्होंने अपने अभियान को इसी धुरी पर केंद्रित किया।
असम में 'परिसीमन' गेमचेंजर साबित हुआ
असम में 2023 में 'परिसीमन' का असर गेमचेंजर साबित हुआ। इसने असम की राजनीतिक गणित को पूरी तरह बदल दिया। अल्पसंख्यक-प्रभाव वाली करीब 35 सीटें घटकर लगभग 23 रह गईं, जिससे जनजातीय व स्थानीय समुदायों का प्रभाव बढ़ा और कई सीटों पर पुराने वोट बैंक समीकरण टूट गए।
कमजाेर हुआ विपक्ष
इस परिसीमन ने कांग्रेस और तीसरी सबसे बड़ी पार्टी अखिल भारतीय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (AIUDF) का वोट-टू-सीट कन्वर्जन कमजोर किया। बराक वैली जैसे इलाकों में सीटों के पुनर्गठन ने बड़े नेताओं तक को नई राजनीतिक जमीन तलाशने पर मजबूर कर दिया।
बिस्वा सरकार के वो फैसले, जिससे कांग्रेस के गढ़ में लगाई सेंध
चाय बागान और जनजातीय इलाकों पर बीजेपी की मजबूत पकड़ एक बड़ा कारक रही। असम की 35-45 सीटों पर प्रभावशाली चाय बागान समुदाय, जो पहले कांग्रेस का गढ़ था, बीजेपी के पाले में आया। राज्य सरकार ने श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाई, पक्के घर, बिजली व स्वास्थ्य सुविधाओं से इस पूरे बेल्ट को बीजेपी की ओर मोड़ दिया।
बिखरा विपक्ष, भाजपा को मिला लाभ
विपक्ष का बिखरा हुआ स्वरूप और कमजोर नैरेटिव भी बीजेपी की जीत का अहम कारण बना। इस चुनाव में विपक्षी दल, जिनमें कांग्रेस (दूसरी सबसे बड़ी), बदरुद्दीन अजमल की AIUDF (तीसरी सबसे बड़ी), असम गण परिषद (AJP) और अखिल गोगोई की राइजोर दल शामिल थे, अलग-अलग मैदान में उतरे। गठबंधन पर भ्रम और कोई स्पष्ट विकल्प का अभाव उनके लिए भारी पड़ा।
कांग्रेंस में टूट से भाजपा को मिला लाभ
असम में कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई जोरहाट से चुनाव हार गए।संगठन की आंतरिक खींचतान और नेताओं के पलायन ने भी चुनावों में कांग्रेस को काफी कमजोर किया।
असम से पहले किन राज्यों में भाजपा लगा चुकी है जीत की हैट्रिक?
असम से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लगातार तीन या उससे अधिक बार सरकार बनाने का रिकॉर्ड तीन राज्यों में बना चुकी है।
गुजरात
गुजरात में भाजपा ने 1995 से कई बार लगातार सरकार बनाई (बीच में थोड़े राजनीतिक बदलाव हुए, लेकिन लंबे समय तक सत्ता में बनी रही।
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में 2003, 2008 और 2013 में लगातार तीन बार जीत हासिल की।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में 2003, 2008 और 2013 में लगातार तीन बार जीत चुकी है।
असम में अब भाजपा ने लगाई जीत की हैट्रिक?
इसके बाद असम में भाजपा ने 2016, 2021 और 2026 (हालिया चुनाव) में जीत हासिल कर यह सिलसिला जारी रखा।














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