पंजाब चुनाव में डेरा समर्थकों की बढ़ी सक्रियता, किस दल को मिलेगा फ़ायदा किसे होगा नुकसान ?

पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गुरमीत राम रहीम को फरलो मिलने से सियासी पारा चढ़ गया है।

चंडीगढ़, 15 फरवरी 2022। पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गुरमीत राम रहीम को फरलो मिलने से सियासी पारा चढ़ गया है। पंजाब में मतदान से पहले डेरा समर्थकों की सक्रियता बढ़ गई है। डेरा प्रमुख राम रहीम के समधी हरमिदंर सिंह जस्सी बतौर आज़ाद उम्मीदवार चुनावी रण में ताल ठोक रहे हैं। ख़बर आ रही है कि डेरा की तरफ़ से उनके अनुयायियों को साफ़ निर्देश दिया गया है कि हरमिंदर सिंह जस्सी को किसी भी हालत में जीताना है। सियासी गलियारों में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि गुरमीत राम रहीम को चुनाव से पहले जेल से बाहर लाकर भाजपा इसका सियासी माइलेज ले सकती है।

मालवा रीजन की 69 सीटों पर डेरा प्रेमियों का प्रभाव

मालवा रीजन की 69 सीटों पर डेरा प्रेमियों का प्रभाव

हरियाणा के सिरसा जिले में डेरा सच्चा सौदा स्थित है। लेकिन इसका प्रभाव पंजाब के मालवा रीजन की 69 सीटों पर है। वहीं डेरा समर्थकों का झुकाव किस पार्टी की तरफ़ है इससे अभी तक पर्दा नहीं उठ पाया है। लेकिन डेरा प्रमुख के समधी हरमिंदर सिंह जस्सी के चुनाव प्रचार में डेरा समर्थकों ने पूरी ताक़त झोंक दी है। उन्हें डेरा की तरफ़ से साफ़ किया है कि कि हरमिंदर सिंह जस्सी की जीत किसी भी हालत में सुनिश्चित की जाए। जस्सी के चुनाव प्रचार के मद्देनज़र डेरा प्रेमी अब उनके हलके में घर-घर जाकर प्रचार प्रसार कर रहे हैं। पंजाब के दूसरे ब्लॉकों से आकर डेरा प्रेमी रामा मंडी में हरमिंदर जस्सी के लिए वोट मांग रहे हैं। सभी डेरा समर्थकों की अलग-अलग प्रखंड में ड्यूटी लगाई गई है। डेरा प्रबंधन खुलकर हरमिंदर सिंह जस्सी के समर्थन चुनावी प्रचार कर रहे हैं।

डेरा मुखी के समधी को जीताने की कोशिश

डेरा मुखी के समधी को जीताने की कोशिश

पंजाब के सियासी जानकारों की मानें तो राम रहीम के समधी हरमिंदर सिंह जस्सी कांग्रेस से बग़ावत कर चुनावी रण में उतरे हैं। इसलिए डेरा समर्थकों का झुकाव कांग्रेस की तरफ़ तो नहीं जाएगा। दूसरी तरफ़ डेरा समर्थकों को जस्सी को चुनावी जीताने के लिए पूरी ताक़त झोंकने का आदेश दिया जा चुका है। इसलिए वह उनके प्रचार में पूरी तेज़ी से जुट गए हैं। चुनाव में किसे समर्थन देना है यह आदेश अभी डेरा प्रेमियों को नहीं मिला है। एक बात तो साफ़ हो चुकी है कि डेरा प्रेमियों को कांग्रेस के समर्थन में वोट डालने का निर्देश नहीं दिया जाएगा। क्योंकि अगर उन्हें कांग्रेस के समर्थन में वोट डालने का आदेश दिया गया तो डेरा मुखी के समधी जस्सी के विधानसभा क्षेत्र में इसका असर पड़ सकता है। वही चर्चाएं यह भी हैं कि डेरा समर्थकों को भाजपा के पक्ष में मतदान करने के आदेश मिल सकते हैं। क्योंकि डेरा समर्थकों पहले भी भाजपा के पक्ष में वोट डालते आए हैं।

भाजपा पर विपक्षी दलों ने लगाया आरोप

भाजपा पर विपक्षी दलों ने लगाया आरोप

राम रहीम की फरलो को भाजपा की चाल बता उस सियासी माइलेज लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगा रही है। पंजाब के सभी सियासी दलों का यह आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी ने सियासी फ़ायदे के राम रहीम को फरलो दिलवाई है। वहीं इस मामले में आम आदमी पार्टी की तरफ़ से कोई भी बयान नहीं आया है। आम आदमी पार्टी की तरफ़ किसी भी तरह की प्रक्रिया नहीं आने पर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रहीं हैं। सियासी जानकारों की मानें तो अमित शाह की सियासी रणनीति का एक हिस्सा राम रहीम की फरलो का भी हो सकता है। उन्हीं के दिशा निर्देशों के मुताबिक पंजाब में भाजपा राजनीतिक चाल चल रही है।

मालवा क्षेत्र में डेरा समर्थकों का वर्चस्व

मालवा क्षेत्र में डेरा समर्थकों का वर्चस्व

पंजाब के मालवा क्षेत्र में डेरा समर्थकों का वर्चस्व है उनके रुख को देखते हुए ज़्यादातर सीटों पर बने बनाए समीकरण बदल सकत हैं। चुनाव सलाहकारों की मानें तो इनके प्रभाव से कडे़ मुकाबले वाली सीटों पर भी बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। डेरा सिरसा के लाखों की तादाद में अनुयायी हैं जो मालवा के मानसा, संगरूर, बरनाला, बठिंडा, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब समेत पंजाब के अन्य जिलों से ताल्लुक रखते हैं। डेरा समर्थकों के लिए कोई भी चुनावी मुद्दा मायने नहीं रखता है। डेरे के सियासी विंग जिस पार्टी की तरफ इशारा कर दें उसकी सियासी मैदान मजबूत हो जाती है। सियासी गलियारों में यहां तक कहा जाता है कि डेरे के सियासी विंग के इशारे से पूरी सियासी फ़िज़ा बदल सकती है। डेरा समर्थकों का झुकाव बने बनाए समीकरण को पूरी तरह से पलट सकता है। डेरा समर्थकों का दावा है कि हर विधानसभा सीट क़रीब 40 हज़ार वोट को प्रभावित कर सकते हैं।

18 फरवरी को मिल सकता है आदेश

18 फरवरी को मिल सकता है आदेश

गुरमीत राम रहीम की फ़रलो से डेरा सिरसा से जुडे़ श्रद्धालुओं और अनुयायियों में हलचल तेज हो गई है। डेरा सिरसा से जुड़े अधिकारियों की मानें तो अभी सियासी तौर पर किसी पार्टी को समर्थन देने का कोई फैसला नहीं किया गया है। लेकिन डेरा मुखी के आदेश का सभी लोग पालन करेंगे। सूत्रों की मानें तो डेरा प्रेमियों को डेरा मुखी की तरफ़ से 18 फरवरी को यह आदेश मिल सकता है कि किस सिसायी पार्टी के पक्ष में मतदान करना है। आपको बता दें कि राम रहीम अपने दो महिला अनुयायियों से बलात्कार मामले में सज़ा याफ़्ता है। अगस्त 2017 में उसे पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोषि करार देते हुए 20 साल क़ैद की सज़ा सुनाई है।


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