भागलपुर में बड़ा हादसा टला: आधी रात को गंगा में समाया विक्रमशिला सेतु का हिस्सा
बिहार के भागलपुर जिले में रविवार देर रात विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा गंगा नदी में समा गया। हालांकि, जिला प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी से एक बड़ा हादसा टल गया और जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ।

बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNNL) के अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह ने सोमवार को बताया कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को तीन महीने के भीतर दोबारा तैयार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर फिलहाल पुल के दोनों ओर से ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया है।
भागलपुर को सीमांचल से जोड़ने वाले इस पुल का निर्माण यूपी ब्रिज कॉरपोरेशन ने किया था और यह साल 2001 से चालू है। अधिकारियों के मुताबिक, रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब 12:35 बजे पुल का एक स्पैन पहले धंसने लगा और फिर गंगा नदी में गिर गया।
आईपीआरडी कॉन्फ्रेंस हॉल में पत्रकारों से बात करते हुए सिंह ने कहा, "ट्रैफिक पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तुरंत पुल से वाहनों को हटवाया। इसके कुछ ही देर बाद प्रभावित हिस्सा ढह गया। प्रशासन की सतर्कता की वजह से कोई हताहत नहीं हुआ।"
उन्होंने भागलपुर जिला प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की तारीफ करते हुए कहा कि इस पुल पर भारी ट्रैफिक रहता है और जरा सी चूक बड़े हादसे का सबब बन सकती थी। इस बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात कर क्षतिग्रस्त हिस्से की जल्द मरम्मत के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) और भारतीय सेना की मदद मांगी है।
अधिकारियों ने साफ किया कि पुल का एक स्पैन गिरा है, लेकिन पिलर पूरी तरह सुरक्षित हैं। मौके पर भेजी गई तकनीकी टीम की सिफारिशों के आधार पर पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं, ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को देखते हुए विक्रमशिला सेतु के समानांतर एक फोर-लेन पुल का निर्माण भी चल रहा है, जिसके इस साल दिसंबर तक शुरू होने की उम्मीद है।
हादसे के बाद रूट में बदलाव किया गया है। पश्चिम की ओर से आने वाले वाहनों को मुंगेर के श्रीकृष्ण सिंह सेतु की ओर भेजा जा रहा है, जबकि पूर्व की ओर से आने वाले वाहनों को खगड़िया की तरफ डायवर्ट किया गया है। इसके अलावा, हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए स्टीमर की व्यवस्था भी की जा रही है।
लापरवाही बरतने के आरोप में भागलपुर के कार्यपालक अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) को निलंबित कर दिया गया है, जिन पर पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी थी। अधिकारियों ने बताया कि करीब एक महीने पहले पुल में कुछ छोटी खामियां दिखी थीं, जिसके बाद पथ निर्माण विभाग, BRPNNL और IIT पटना की टीमों ने निरीक्षण किया था। शुरुआती जांच में मुख्य ढांचा सुरक्षित पाया गया था, लेकिन सुरक्षा के लिए बनी 'फॉल्स वॉल' में खराबी की बात सामने आई थी।
फिलहाल, पुल के मेंटेनेंस के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) मंजूरी की प्रक्रिया में है। नई टीमों को मौके पर भेजा गया है और IIT पटना से एक बार फिर सुझाव मांगे गए हैं ताकि पुल को जल्द से जल्द ठीक किया जा सके।












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