मोयना में अशोक डिंडा को मिली धमाकेदार जीत, लगातार दूसरी बार बरकरार रखी अपनी बादशाहत!
West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज अशोक डिंडा का सियासी स्पेल मैदान पर बेहद असरदार है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर मोयना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे डिंडा ने लगातार दूसरी बार अपनी सीट बरकरार रखी है। इतना ही नहीं वह अपनी जीत के अंतर को भी कई गुना बढ़ाकर विरोधियों को पस्त कर दिया।
पिछली बार की मामूली बढ़त, इस बार बंपर जीत (West Bengal Assembly Election 2026)
साल 2021 के चुनावों में जब अशोक डिंडा पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे, तब मुकाबला बेहद कड़ा था। उस वक्त उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संग्राम कुमार डोलाई को महज 1260 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आई। डिंडा ने टीएमसी के उम्मीदवार चंदन मंडल को 16,241 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी। मोयना की जनता ने डिंडा के पिछले 5 साल के कामकाज पर मुहर लगाते हुए उन पर दोबारा भरोसा जताया है।

ऐसा रहा है क्रिकेटिंग करियर
अशोक डिंडा ने साल 2009 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था। भारत के लिए 13 वनडे और 9 टी20 मैच खेलने वाले डिंडा को उनकी तेज गेंदबाजी और ऊंचे जंप वाले एक्शन के लिए जाना जाता था। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 420 विकेट लेने वाले इस दिग्गज ने 2021 में संन्यास के तुरंत बाद भाजपा का दामन थामा था। राजनीति में आने के बाद से ही वे अपने क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं, जिसका लाभ उन्हें इस चुनाव में स्पष्ट रूप से मिला।
बंगाल में भाजपा का दमदार प्रदर्शन
अशोक डिंडा की यह जीत भाजपा के उस बड़े प्रदर्शन का हिस्सा है, जिसमें पार्टी बंगाल में बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है। इस बार बंगाल के मतदाताओं ने वोटिंग के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक दो चरणों में हुए मतदान का कुल औसत 92.93 फीसदी रहा, जो कि देश के चुनावी इतिहास में किसी भी राज्य के लिए एक नया रिकॉर्ड है। भारी मतदान का सीधा फायदा भाजपा को मिलता दिख रहा है।
मोयना के मतदाताओं का नया रिकॉर्ड
मोयना सीट पर डिंडा की जीत के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता को मुख्य वजह माना जा रहा है। चंदन मंडल जैसे कड़े प्रतिद्वंद्वी के सामने 16 हजार से अधिक वोटों की बढ़त हासिल करना यह दर्शाता है कि इलाके में टीएमसी का 'खेला' इस बार डिंडा की 'बाउंसर' के आगे टिक नहीं पाया।















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