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पंजाब में बड़ा सियासी धमाका कर सकते हैं कैप्टन, दो संकेतों से समझिए पूरा सियासी गणित

पंजाब की सियासत में इन दिनों काफ़ी उलट फेर देखने को मिल रहा है। कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया और सियासी सफ़र जारी रखते हुए अपनी नई सियासी पार्टी बनाने की

चंडीगढ़, अक्टूबर 30, 2021। पंजाब की सियासत में इन दिनों काफ़ी उलट फेर देखने को मिल रहा है। कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया और सियासी सफ़र जारी रखते हुए अपनी नई सियासी पार्टी बनाने की भी घोषणा कर दी। कैप्टन अमरिंगर सिंह की नई पार्टी बनाने से पंजाब कांग्रेस को काफ़ी नुकसान हो सकता है। पंजाब में जो हिंदू वोट बैंक कांग्रेस के पास कैप्टन वजह से वह कैप्टन की नई पार्टी बनाते ही उनकी तरफ़ शिफ़्ट हो जा जाएगा। जिसकी भरपाई का कांग्रेस के पास कोई विकल्प नहीं है।

बड़ा धमाका कर सकते हैं कैप्टन

बड़ा धमाका कर सकते हैं कैप्टन

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के भारतीय जनता पार्टी से नजदीकियां बढ़ाने से भाजपा को भी काफ़ी फ़ायदा होते दिख रहा है। भाजपा को बिना मेहनत किए ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाला सिख चेहरा मिल जाएगा। 27 अक्टूबर को कैप्टन ने संवाददाता सम्मेलन में सियासी पार्टी बनाने को लेकर साफ़ कर दिया था कि जल्द ही वह पार्टी का नाम और चिन्ह की घोषणा करेंगे। संवादाता सम्मेलन में ही कैप्टन अपनी पार्टी का गठन करने की तैयारी में थे, लेकिन आख़री वक्त में उन्होंने अपना फ़ैसला बदल लिया। वहीं अमित शाह से उनकी मुलाक़ात 28 अक्टूबर को होनी थी जो कि शाह की व्यस्तता की वजह से नहीं हो पाई। यह दो संकेत हैं कि कैप्टन कोई बड़ा धमाका करने की तैयारी में हैं।

कैप्टन की सियासी राह

कैप्टन की सियासी राह

पंजाब के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ हो चुकी है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को मनाने का ज़िम्मा ख़ुद कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय सोनिया गांधी ने लिया है। कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस छोड़ें यह पार्टी आलाकमान नहीं चाहती है। यही वजह है कि कैप्टन के लगातार ज़ुबानी हमले के बावजूद पार्टी आलाकमान ने उनके खिलाफ़ कार्रवाई नही की। दूसरी ओर कैप्टनन अमरिंदर सिंह कांग्रेस से नाता तोड़कर नई सियासी राह पर चलने की पूरी कोशिश में हैं और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से नज़दीकियां बढ़ानी शुरू कर दी हैं। वहीं पार्टी आलाकमान लगातार कैप्टन को मनाने की कोशिश में लगी हुई है।

कैप्टन को मनाने की कोशिश

कैप्टन को मनाने की कोशिश

कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को मनाने की पूरी कोशिश सोनिया गांधी की तरफ़ से किया जा रहा है। कैप्टन के अपनी पार्टी बनाने की घोषणा के बाद अब भी कांग्रेस पार्टी नहीं चाहती है कि कैप्टन पार्टी छोड़ें क्योंकि कैप्टन ऐसा करने से आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सियासी ज़मीन खिसक जाएगी। वहीं कांग्रेस के लिए यह भी चुनौती बनी हुई है कि अगर कैप्टन पार्टी में वापस आते हैं तो कांग्रेस को सिद्धू और अमरिंदर सिंह में से किसी एक को चुनन पड़ेगा। जिस तरह से सिद्धू ने कैप्टन के सीएम रहते हुए उनके खिलाफ़ मुहिम चलाया और उन्हें इस्तीफ़ा देने पड़ गया। आलाकमान ने भी कोई ठोस क़दम नहीं उठाया।

पंजाब कांग्रेस में पक रही खिचड़ी

पंजाब कांग्रेस में पक रही खिचड़ी

पंजाब कांग्रेस में अंदर ही अंदर खिचड़ी पक रह है। एक तरफ़ नवजोत सिंह सिद्धू के बारे में यह चर्चाएं तेज़ हैं कि सिद्धू ने अपना इस्तीफ़ा वापस नहीं लिया है। पार्टी आलाकमान यह फ़ैसला नहीं कर पा रही है कि सिद्धू पार्टी में रहेंगे या फिर पार्टी छोड़ेंगे। क्योंकि सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि नवजोत सिंह सिद्धू आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। इस वजह से भी पंजाब कांग्रेस को मज़बूत करने के लिए पार्टी आलाकमान पुरज़ोर कोशिश कर रही है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की घर वापसी करा ली जाए।


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