पंजाब: सियासी घमासान के बीच CM चन्नी और सिद्धू ने लगाया मास्टरस्ट्रोक, जानिए पूरा मामला
वह पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सियासी ज़मीन मज़बूत करने में भी जुट गए हैं। इसी बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस छोड़ने की ख़बर सुर्खियों में है वहीं नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफ़े पर अभी संशय बरक़रार है।
चंडीगढ़, अक्टुबर 2, 2021। पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान पर लगाम लगाने के लिए नवनियुक्त सीएम पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं। साथ ही वह पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सियासी ज़मीन मज़बूत करने में भी जुट गए हैं। इसी बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस छोड़ने की ख़बर सुर्खियों में है वहीं नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफ़े पर अभी संशय बरक़रार है। सिद्धू ने अपने इस्तीफ़े में कहा है कि वो पंजाब के हक़ में किसी मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे। सिद्धू की सियासी गणित को देखा जाए तो वह सिखों से जुड़े मुद्दों को एजेंडा बनाने की कोशिश करते रहे हैं। उनकी कोशिश है कि शिरोमणि अकाली दल के वोट बैंक में सेंध मारी कर सकें।

पंजाबी और पंजाबियत की जीत होगी- सिद्धू
नवनियुक्त मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच काफ़ी हद तक कई मुद्दों पर सहमती बन चुकी है। सिद्धू के साथ हुई बैठक के बाद कई मुद्दो को अमली जामा पहनाया जा रहा है। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी में उन्हें कोई पद नहीं भी दिया जाए तो भी वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ खड़े रहेंगे। गांधी जी और शास्त्री के सिद्धांतों पर चलते रहेंगे। उन्होंने कहा कि नकारात्मक शक्तियों ने मुझे हराने की काफ़ी कोशिश की लेकिन सकारात्मक ऊर्जा की वजह से पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत की जीत होगी। नवजोत सिंह सिद्धू ने दावा किया कि पंजाब कांग्रेस एक है और आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी फिर से प्रचंड जीत के साथ वापस लौटेगी।

सिद्धू की रणनीति
ग़ौरतलब है कि अप्रैल, 2019 में पंजाब कैबिनेट से इस्तीफ़े के बाद जब सिद्धू ने सियासी तैयारियां शुरू कीं तो सबसे पहले फ़रीदकोट में बरगारी गांव के पास बुर्ज जवाहर सिंह वाला गुरुद्वारा गए। गुरु ग्रंथ साहिब के पन्नों से छेड़छाड़ के मामले में हुए विवाद और हिंसा के बाद यह गांव काफ़ी सुर्खियों में रहा था। इस घटना को सड़के पर सिखों के प्रदर्शन में दो सिखों की जान भी गई थी। सियासी गलियारों में यह हलचल है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने जान-बूझ कर उस मुद्दे को उठाया और इस मामले में न्याय दिलाने की बात की। इस दांव के ज़रिए वह बादल परिवार और कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार दोनों को एक साथ निशाने पर ले रहे थे। इसके ज़रिए नवजोत सिंह सिद्धू यह संदेश देना चाह रहे थे कि वह और कांग्रेस दोनों सिखों की पक्षधर है। इस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू सिख वोटों को लामबंद करने की कोशिश के साथ ख़ुद को सिख परस्त बनाने की कोशिश करते दिखे।
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सिद्धू ने ज़ाहिर की थी नाराज़गी
आपको बता दें कि पंजाब के नए डीजीपी और एडवोकेट जनरल की नियुक्ति पर नवजोत सिंह सिद्धू ने सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि कांग्रेस आलाकमान की तरफ़ से सिद्धू का इस्तीफ़ा मंज़ूर नहीं किया साथ ही सीएम चन्नी को उन्हें मनाने का ज़िम्मा सौंप दिया गया। वहीं सीएम चन्नी ने सिद्धू से मुलाकात की और उनके गिले-शिकवे दूर कर आगामीं विधानसभा की तैयारियों में जुट गए हैं।

सीएम चन्नी ने की घोषणा
सीएम चन्नी ने किसान आंदोलनकारियों के खिलाफ पंजाब में दर्ज मुकदमों को वापस लेने का आदेश दिया है। ये मुकदमे रेलवे ट्रैक बाधित करने पर RPF की तरफ़ से दर्ज करवाए गए थे।पंजाब के नवनियुक्त सीएम चन्नी ने कोरोना महामारी में अपने मां-बाप गंवा चुकी लड़कियों के लिए भी राहत की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आशीर्वाद स्कीम में अब लाभार्थी लड़कियों के लिए आय की सीमा हटा ली गई है। वहीं सीएम चन्नी ने राज्य में 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त होने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए फैमिली पेंशन बहाल करने का भी ऐलान किया है।
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