पद्म विभूषण बाबासाहेब पुरंदरे नहीं रहे, शिवाजी महाराज पर लिखी थीं किताबें, CM-PM ने जताया दुख
पुणे। भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध लेखक व इतिहासकार बाबासाहेब पुरंदरे का निधन हो गया है। वह 99 साल के थे। तबियत बिगड़ने पर उन्हें पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल लाया गया था, जहां वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। डाॅक्टरों ने सोमवार सुबह 5 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। अब आज सुबह 10.30 बजे पुणे के वैकुंठ श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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कौन थे बाबासाहेब पुरंदरे, कैसे हुई मौत?
बाबासाहेब पुरंदरे के करीबियों के मुताबिक, शनिवार को बाथरूम में गिरने के बाद इतिहासकार-लेखक बाबासाहेब पुरंदरे को पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। हालांकि, उनकी जान बच नहीं पाई और सोमवार सुबह 5 बजे पद्म विभूषण बाबासाहेब पुरंदरे का अस्पताल में ही निधन हो गया। डॉक्टरों ने बताया कि, वह 99 साल के थे और पुणे के अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखे गए थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज पर लिखे थे आलेख
महाराष्ट्र में बाबासाहेब पुरंदरे का नाम बहुत आदर से लिया जाता है, क्योंकि उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज पर लिखे गए आलेखों के कारण सम्मानित किया गया था। उन्होंने शिवाजी के शासन के समय की राज-व्यवस्था, उनके प्रशासन और किलों पर कई किताबें लिखीं। छत्रपति के जीवन पर बाबा साहेब पुरंदरे ने एक लोकप्रिय नाटक 'जांता राजा' का भी निर्देशन किया था।

2019 में पद्म विभूषण से नवाजे गए थे
बाबासाहेब पुरंदरे को 2015 में, राज्य सरकार से महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार मिला। उसके अलावा 2019 में, उन्हें भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण मिला। इस प्रकार, बाबासाहेब पुरंदरे एक प्रसिद्ध लेखक, इतिहासकार और रंगमंच व्यक्तित्व थे।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने दुख जताया
पुरंदरे के निधन पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, "शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे का निधन इतिहास और संस्कृति की दुनिया में एक बड़ा शून्य छोड़ता है। उन्हीं की बदौलत आने वाली पीढ़ियां छत्रपति शिवाजी महाराज से और जुड़ेंगी।"












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