बिहार में फिर गूंजेगा गीत- ओ वुमनिया, अआ वुमानिया

पिछले चुनाव में चार महिला उम्मीदवारों को बिहार के मतदाताओं ने संसद भेजा था। बाद में महिला सांसदों की संख्या पांच हो गई थी, क्योंकि बांका के सांसद दिग्विजय सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उनकी पत्नी पुतुल कुमारी विजयी होकर संसद पहुंची थीं। झारखंड के अलग होने के बाद पहली बार बिहार की पांच महिलाएं सांसद बनी थीं।
वर्ष 2014 में हो रहे लोकसभा चुनाव में पिछले चुनाव में जीत दर्ज कर चुकीं मीरा कुमार, रमा देवी, पुतुल कुमारी, अश्वमेघ देवी और मीना सिंह एक बार फिर चुनावी अखाड़े में पुरुष उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे रही हैं।
इस चुनाव में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद की पुत्री मीसा भारती, कांति सिंह, पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना साहेब, पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन, आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और खगड़िया से कृष्णा यादव जैसी महिलाएं भी इस बार चुनावी अखाड़े में खम ठोंक रही हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो 14वीं लोकसभा चुनाव में बिहार से चार महिलाएं संसद की देहरी लांघ सकी थीं, जबकि उसके पहले यानी 13वीं लोकसभा में तीन महिला सांसदों ने बिहार के तीन विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व संसद में किया था।
12वें लोकसभा चुनाव में चार, 11वें लोकसभा चुनाव में तीन और 10वें लोकसभा चुनाव में चार महिला सांसद बिहार से चुनी गई थीं। आठवीं लोकसभा चुनाव में बिहार से नौ महिला सांसद चुनी गई थीं। खास बात यह कि चुनी गईं सभी उम्मीदवार कांग्रेस पार्टी की थीं। उल्लेखनीय है कि राज्य में दो चरणों में 13 सीटों के लिए मतदान हो चुका है, चार चरणों में मतदान होना बाकी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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