जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल के कारण दो मरीजों की मौत
पटना (मुकुंद सिंह)। आठ सितंबर को सड़क हादसे में घायल बेगूसराय के 45 वर्षीय अर्जुन मलाका की मौत हो गई। उन्हें पीएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया था। मौत का कारण हड़ताल। यही नहीं सीमा देवी की मौत का भी कारण था।
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एडमिट करने के बाद उनके सेहत में सुधार भी हो रहा था लेकिन शनिवार की देर रात जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल के कारण उन्हें कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। एक घंटे तक परिजन इमरजेंसी के कंट्रोल रूम से डॉक्टर्स के चैंबर तक दौड़ते रहे लेकिन कोई उनकी बात सुनता तब तक अर्जुन की हालत गंभीर हो चुकी थी। रात दस बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। ऐसी ही एक दूसरी घटना में इमरजेंसी में भर्ती सीमा देवी के साथ हुआ।
दो मरीजों की मौत होने के बाद भी सीनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी में चिकित्सकीय व्यवस्था को ठीक करने का कोई उपाय नहीं किया। हालत ऐसे हो गये कि रविवार की सुबह दस बजे तक इमरजेंसी और विभिन्न वार्डों में भर्ती 12 मरीजों की हालत गंभीर हो गई।
बातचीत विफल
इसमें दो मरीज पीएमसीएच छोड़ निजी अस्पताल चले गए। जूनियर डॉक्टरों का आरोप है कि एक सामाजिक संगठन से जुड़ी महिला के मरीज का उपचार हो रहा था लेकिन उसने बेवजह इमरजेंसी में हंगामा किया और एक डॉक्टर की पिटाई भी कर दी। उसकी गिरफ्तारी, डॉक्टरों की सुरक्षा और संसाधन उपलब्ध कराने को लेकर रविवार की सुबह अस्पताल प्रशासन और जूनियर डॉक्टरों के बीच लगभग चार घंटे तक बातचीत चली।
इधर मरीजों की स्थिति खराब हो रही थी। सुबह 11 बजे हथुआ वार्ड और टाटा वार्ड में कई मरीजों की स्थिति गंभीर होने की सूचना इमरजेंसी के कंट्रोल रूम को मिली। वार्ड में डाक्टर नहीं रहने के कारण परिजन इमरजेंसी पहुंच गए।
टाटा वार्ड में भर्ती धर्मशीला देवी के मुंह से अचानक खून की उल्टी होने लगी। परिजन दौड़ कर इमरजेंसी पहुंचे लेकिन वहां कोई भी डॉक्टर वार्ड में जाने को तैयार नहीं हुआ। अंत में एक हेल्थ मैजेनर टाटा वार्ड गई और मरीज को देखा। मरीज की अभी भी हालत गंभीर बनी हुई है।













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