रॉकी की मम्मी मनोरमा देवी की लवस्टोरी तो जान लीजिए
पटना (मुकुन्द सिंह)। बिहार के चर्चित और हाई प्रोफाइल आदित्य सचदेवा हत्याकांड के मुख्य आरोपी रॉकी यादव पिता बिंदी यादव और मां मनोरमा देवी फिलहाल बेटे के द्वारा की गई गुनाहों की सजा काटते हुए जेल में कैद हैं। वही जेल मे मनोरमा देवी को वहां का खाना, सोना और रहना बिल्कुल ही नहीं पसंद आ रहा है। जज बनकर कोर्ट पहुंची मनोरमा देवी, सुनवाई के बाद चली गईं लाल किला

जेल का रुखा सुखा खाना तो सोने के वक़्त मच्छरों का काटना और दिनभर चारदीवारी के अंदर कैद रहना भला इस लग्जरी फैमिली को कैसे पसंद आ सकता है। जिनकी दिन और रातें आलीशान मकानों और वातानुकुलित मौसमों में गुजरी है। लेकिन अब हम आपको बताने जा रहे हैं वह कहानी जिसे सुनकर आप कहेंगे वाकई मोना ने बिंदी की किस्मत बदल दी।
कैसे बनी कबूतरी की बेटी मोना से मनोरमा देवी
आपको बताते चलें की जदयू के निलंबित और फिलहाल जेल में बंद MLC मनोरमा देवी एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनके पिता हजारा सिंह एक पंजाबी थे और ड्राइवर का काम करते थे। जिसके वजह से उनका बिहार के गया मे आना-जाना अक्सर लगा रहता था। वहीं गया आने के बाद आराम के लिए एक ढाबे पर ठहरते थे। उसी ढाबे पर ढाबे के मालिक की बेटी कबूतरी भी रहा करती थी। अक्सर आने-जाने के दौरान कबूतरी को हजारा सिंह से मोहब्बत हो गई और दोनों ने शादी कर ली।
शादी के बाद हजारा सिंह गया में ही जमीन लेकर घर बसा लिया। घर बसाने के बाद कबूतरी और हजारा सिंह को दो लड़के और एक लड़की पैदा हुई। हालांकि कबूतरी और हजारा सिंह दोनों एक साधारण परिवार से बिलॉन्ग करते थे जिसके वजह से बच्चों की पढ़ाई लिखाई कुछ ज्यादा नहीं हो पाई। बड़ी लड़की मोना ने इंटर तक पढ़ाई की थी।
बिंदी की दूसरी पत्नी बनते ही मनोरमा ने बदल दी साईकिल चोर की किस्मत
बिंदी यादव उर्फ बिंदेश्वरी यादव ने अपनी जिंदगी की शुरुआत एक साइकिल चोरी से की थी। बिंदी यादव के ऊपर सबसे पहला मुकदमा एक दुकानदार की साइकिल चोरी का था जिसके आरोप में बिंदी यादव सलाखों के पीछे चला गया। उसकी पहली पत्नी ने उसका साथ छोड़ दिया। जेल से बाहर निकालने के बाद बिंदी यादव फिर से छोटो-मोटे अपराध करना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे बड़े माफियाओं के संपर्क में पहुंचा। जिसके बाद उसने ठेकेदारी करनी शुरू कर दी।
ठेकेदारी के ही दौरान बिंदी की मुलाकात मनोरमा से हुई और 1989 मे बिंदी ने मनोरमा से देवघर मंदिर में जा कर शादी कर ली। वहीं शादी के वक्त मनोरमा की उम्र मात्र 19 वर्ष की थी। शादी के वक्त बिंदी छोटा मोटा ठेकेदारी करता था। लेकिन शादी के बाद मनोरमा ने बिंदी यादव की किस्मत बदलते हुए बिंदी से बिंदेश्वरी बना दिया। ठेकेदारी में इतना बढ़ोतरी हुआ कि बिंदी की किस्मत आसमान छूने लगी और घर मे धन की वर्षा होने लगी।
क्षेत्र में बाहूबली कहलाने के लिए बिंदी 1990 मे थामा लालू का दामन
ठेकेदारी में हुई बढ़ोत्तरी और धन की वर्षा को देखते हुए बिंदी और मनोरमा देवी के पास दबंग छवि तो थी लेकिन राजनीति का कोई हाथ नहीं था। जिसे देखते हुए बिंदी यादव ने 1990 में लालू यादव का हाथ थामते हुए राजनीतिक में एंट्री ली। राजनीति में एंट्री मिलते ही बिंदी यादव का बाहूबली और दबंग वाली छवि और बढ़ गई। जिसके बाद 2001 में बिंदी यादव ने पहली बार जिला पार्षद का चुनाव लड़ा और अध्यक्ष बने।
वहीं विधानसभा चुनाव में भी बिंदी यादव ने दो बार राजद के टिकट से किस्मत आजमाई लेकिन उन्हें कामयाबी हासिल नहीं हो सकी। लेकिन अपनी ताकत और बाहुबलियत के बदौलत उसने पत्नी मनोरमा देवी को एमएलसी बनाने में कामयाब रहा। और 2003 से 2009 तक मनोरमा देवी राजद की MLC रहीं। फिर मनोरमा ने राजद का साथ छोड़ जदयू का दामन थामा और 2015 में जदयू से MLC बनीं । लेकिन उनके बेटे रॉकी की एक गलती ने पूरे परिवार का सत्यानाश कर दिया। जहां मनोरमा देवी जेडीयू से निष्कासित हो गईं तो एमएलसी एंड फैमिली काल की कोठरी में बंद है।












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