बिहारः 'गंगा' ने बनाई 20 से ज्यादा घाटों से दूरी, छठव्रतियों को 'अर्द्ध' की चिंता

छठ का पावन त्योहार तीन दिन बाद दस्तक देने वाला है। मगर उससे पहले बिहार की राजधानी पटना में हलचल का माहौल हैं। बिहार के कई घाटों से गंगा की अविरल धारा तीन किलोमीटर दूर चली गई है। जिनमें मुख्यतः बांस घाट, कृष्णा घाट, समाहरणालय घाट, महेंद्र घाट और दरभंगा हाउस घाट आदि से गंगा की धारा बहुत दूरी पर बह रही हैं। ऐसे में, जहां छठव्रती घाट पर ही खडे़ होकर ही सूर्य देव को अर्द्ध देते हैं, वहीं गंगा की धारा के दूर चले जाने पर छठव्रतियों का गंगा तट पर पहुंचना कठिन हो जाएगा और वे गंगा की तट से सूर्य देव की स्तुति कैसे करेंगे, हालांकि सरकारी महकमा इसकी पूरी कोशिश में जुटा है कि छठ व्रतियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

chhath pooja

अधिकारियों के अनुसार, पटना एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में गंगा नदी के किनारे 72 से ज्यादा ऐसे निबंधित घाट हैं, जहां छठ पर्व के मौके पर व्रती सूर्य देव को अर्द्ध देने पहुंचते हैं। इनमें से करीब 20 से ज्यादा ऐसे घाट हैं, जहां गंगा की धारा तट से दूर हो गई है। व्रतियों का मानना है कि छठ जैसे पावन पर्व को संस्कृति की जननी गंगा के तट पर करना छठ को और पावन बनाता है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बांकीपुर के विधायक नितिन नवीन ने कहा कि पटना के प्रसिद्घ घाटों पर सरकार ने कोई व्यवस्था नहीं की है। लगभग सभी घाटों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है।

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि लख घाट पर नदी के मुहाने पर काफी तीव्र ढाल हैए जबकि नासरीगंज घाट के संपर्क पथ पर अतिक्रमण के साथ कई जगह पर गड्ढे हैं।

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