बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री का परिवार मजदूरी करने पर मजबूर

पटना( मुकुंद सिंह) आजकल के जमाने में चल रहे राजनीतिक दौर को देख कर लगता है कि यह कमाई का सबसे बड़ा रास्ता है। क्योंकि राजनीति की आर मे घोटाले और फर्जीवाड़ा के साथ ब्लैकमैलिंग के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने इस बात पर मोहर लगाई है।

Family of former Chief minister forced to do labour work in Bihar

तो अगर कुछ अपवाद को छोड़ कर सांसद विधायक की बात कौन करे एक साधारण पंचायत का मुखिया बनने के बाद उनकी संपत्ति में अचानक आश्चर्यजनक वृद्धि हो जाती है। लेकिन कई ऐसे भी लोग हैं जो राजनीति में पद और प्रतिष्ठा मिलने के बाद कभी भी अपने सिद्धांत और जमीर का सौदा नहीं करते हैं।

जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान के बारे में जिन्होंने आज तक कभी भी अपने सिद्धांतों और जमीर से समझौता नहीं किया। और अपनी ईमानदारी का मिसाल पेश करते हुए पूर्णिया के साथ-साथ अपने गांव बैरगाछी में भी आज तक कोई संपत्ति अर्जित नहीं की। बिहार में तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद आज भी उनका परिवार 6 डिसमिल जमीन मे अपना जीवन गुजारने को विवश है। वही उनके परिवार के लोग आज भी मनरेगा में मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर परिवार चलाते हैं।

कौन थे भोला पासवान

भोला पासवान जो निलहे अंग्रेज के हरकगुरू के पुत्र थे। जिन्होंने बीएचयू से शास्त्री की डिग्री की उपाधि हासिल की थी। भोला पासवान वर्ष 1968, 1969 और1971 में तीन भाग प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। जिसके बाद वो 1972 में राजसभा सांसद चुने गय थे। सांसद के बाद वो केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। वही 4 दिसंबर 1984 को उनका देहांत हो गया।

जानिए आज किस हाल में जी रहा है उनका परिवार

आपको बताते चलें कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान का निवासस्थान पूर्णिया जिले के काझा कोठी के पास बैरगाछी गांव का है। जहां आज भी उनका परिवार रहता है। लेकिन तीन बार सूबे के मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनका परिवार आज भी एक सामान्य लोगों की तरह और मजदूरी कर अपना जीवन यापन करना परता है। क्योंकि वह मुख्यमंत्री रहने के बाद भी अपने परिवार और परिजनों को अपने पद से दूर रखा था।

वैसे तो पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान का गांव बैरगाछी एक समृद्ध गांव है मगर उनका घर देखने से यह लगता है कि कोई दलित बसे हो। लेकिन उनका घर ढूँढने मे किसी को ज्यादा परेशानी नहीं होती है। क्योंकि वहां उनके ही जमीन में एक सामुदायिक भवन बना हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान के भतीजे बिरंची पासवान अगर मानें तो उन्होंने अपने चाचा जैसे महान पुरुषों की याद स्मारक बनाने के लिए यह जमीन सरकार को मुफ्त दे दी है।

आपको बताते चलें की भोला पासवान के घर में अब कुल 12 परिवार रहते हैं। वही 6 डिसमिल जमीन में ही 12 परिवार किसी तरह अपना जीवन गुजर बसर करते थे । लेकिन अपने पुरखों की यादों ताजा रखने के लिए 6 डिसमिल जमीन का एक बड़ा हिस्सा सरकार को स्मारक बनाने के लिए दिया है। बाकी बची हुई जमीन में यह 12 परिवार एक कमरे में तीन -तीन लोग रहते हुए मजदूरी कर किसी तरह अपना दिन गुजार रहे हैं।

आपको इनका घर और रहन-सहन देखकर ये नहीं लगेगा कि यह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री का घर है और उनके परिजन इस तरह की परेशानी में जी रहे हैं। वही इनके घर और परिजनों की हालत देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि दूसरे पूर्व मुख्यमंत्रियों से इनकी तुलना नहीं की जा सकती है क्योंकि इनमें और उन में जमीन आसमान का फर्क नजर आता है।

आपको बताते चलें कि यह उस बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार की हालत है जहां पूर्व मुख्यमंत्रियों को तरह-तरह की सुविधा दी जाती है। लेकिन आज कल के नेता उनके पुंयतिथि और जयंती पर माला चाढाते हुए नेता अपनी राजनीति की रोटी सेकते हैं। वही दलितों की नाम की राजनीति करने वाले किसी भी नेताओं को आज तक इस ईमानदार नेता के बेसहारा परिवार की आज तक याद तक नहीं आई है।तो आज के दौर में दलितों की नाम की राजनीति कर अपने पेट चलाने वाले और जेब भरने वाले नेताओं से भोला पासवान के परिवार काफी नाराज है।

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