बिहार में चुनावी चेहरे की रस्साकशी के कई हैं पेंच
पटना (मुकुंद सिंह)। बिहार में विधानसभा के दो चुनावों का और पिछले लोकसभा बनाम इस विधानसभा के चुनाव का एक खास फर्क चुनावी चेहरों का है। पिछले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में चेहरे एकदम साफ थे। पांच साल पहले विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार बनाम लालू प्रसाद का मुकाबला था। इस बार नीतीश कुमार बनाम कौन का प्रचार हो रहा है।
बिहार चुनाव: उनसे मिलिये जिन्हें विरासत में मिली राजनीति
लोकसभा चुनाव में भी बिहार में एक तरफ नरेंद्र मोदी का चेहरा था तो दूसरी ओर नीतीश कुमार का चेहरा था। इसमें नरेंद्र मोदी ने बाजी मारी थी। 2010 के विधानसभा चुनाव में नीतीश बनाम लालू के मुकाबले में नीतीश कुमार निर्णायक रूप से जीते थे।
इस बार के चुनाव में सब कुछ बदल गया है। वर्तमान में कौन सा चेहरा गायब हुआ, कौन सा छाया हुआ है, समझते हैं इन महत्वपूर्ण बिंदुओं में।
- ढाई दशक तक बिहार की राजनीति पर छाया रहने वाला लालू प्रसाद का चेहरा गायब है। वे अपनी पार्टी के सुप्रीमो हैं और प्रचार भी करेंगे लेकिन वे खुद चुनाव नहीं लड़ सकते।
- लालू चुनाव नहीं लड़ सकते। उनसे किसी का मुकाबला नहीं होगा, इसलिये उन्होंने जहर का घूंट पीकर नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।
- बिहार में इस वक्त नीतीश कुमार के मुकाबले कोई चेहरा नहीं है। भाजपा में एक भी राज्यस्तरीय नेता नीतीश की टक्कर का नहीं।
- लोकसभा में नरेंद्र मोदी का चेहरा था, लेकिन इस बार भी भाजपा उनके मुकाबले नरेंद्र मोदी का चेहरा देगी, इसकी संभावना कम है।
- भाजपा किस चेहरे को लेकर आगे बढ़ेगी यह सस्पेंस रोचक हो गया है। वह कोई चेहरा सामने करेगी भी या नहीं, इस बारे में भी संदेह है।
नये चेहरे जो आ सकते हैं आगे
इस बार कई नए चेहरे भी सामने आए हैं। जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बना कर और फिर हटा कर नीतीश ने उनका ब्रांड बना दिया है। इसी तरह पप्पू यादव कोशी और सीमांचल में ताल ठोंक रहे हैं। अघोषित रूप से सुशील मोदी का चेहरा भी नीतीश के सामने प्रोजेक्ट हुआ है।













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