नीतीश कुमार ने दिया अल्टीमेटम- यदि केंद्र जाति आधारित जनगणना नहीं कराता तो राज्य स्तर पर शुरू हो सकती है कवायद
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यदि केंद्र सरकार जाति आधारित जनगणना नहीं करती है तो बिहार में राज्य स्तर पर जाति के आंकड़ों के लिए कवायद शुरू की जा सकती है।
पटना, 9 अगस्त। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यदि केंद्र सरकार जाति आधारित जनगणना नहीं करती है तो बिहार में राज्य स्तर पर जाति के आंकड़ों के लिए कवायद शुरू की जा सकती है। बता दें कि नीतीश कुमार ने जाति आधारित जनगणना के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा था, पत्र का कोई जवाब न मिलने पर नीतीश कुमार का यह बयान सामने आया है।
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आज पटना में मीडिया से बातचीत में उन्होंने भारत की जाति भिन्नता को ध्यान में रखते हुए जाति आधारित जनगणना की मांग दोहराई। जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर बिहार विधानसभा में साल 2019 और 2020 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ था। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि, 'यह समझना होगा कि फैसला केंद्र को लेना है। हमने अपनी मांग रखी। इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं है, यह एक सामाजिक मामला है।'
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यह पूछे जाने पर कि यदि केंद्र ऐसा करने से इंकार करता है तो क्या राज्य स्तर पर ऐसा किया जायेगा? इस पर नीतीश कुमार ने कहा फिर हम इस पर यहां चर्चा करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जाति आधारित जनगणना से सभी जातियों को मदद मिलेगी और उनकी सही संख्या पता चल सकेगी। इसके आधार पर नीतियां बनाई जा सकेंगी।
क्यों उठ र ही है जाति आधारित जनगणना की मांग
दरअसल भारतीय राजनीतिक दलों का जाति आधारित राजनीति कर वोट बटोरने का पुराना इतिहास रहा है। चुनावों के समय कमोवेश हर राजनीतिक दल जाति वर्ग के लोगों की बहुलता को देखते हुए अपना ऐजेंडा तैयार करते हैं। जातिगत जनगणना के आधार पर ही सियासी पार्टियों को अपना समीकरण और चुनावी रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। जाति आधारित जनगणना का मुद्दा उठाकर सभी राजनीतिक दलों की दिलचस्पी अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की सटीक आबादी जानने को लेकर है, ताकि उनकी संख्या के आधार पर आगे की रणीनीति तैयार की जा सके।
यूपी चुनाव से पहले क्यों उठी मांग
दरअसल उत्तर प्रदेश में ओबीसी मतदाता प्रदेस की लगभग 50 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए योगी मंत्रिमंडल में कई बड़े ओबीसी चेहरों को जगह दी गयी है। वहीं अगर बिहार की बात की जाए तो राज्य में 26 फीसदी ओबीसी हैं। ओबीसी को साधने के लिए ही नीतीश कुमार जाति आधारित जनगणना की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि देश में आखिरी बार साल 2011 में जनगणना हुई थी और अब 2021 में जनगणना होगी है।












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