शराबबंदी के बावजूद बिहार में पी सकेंगे शराब, बदल जाएंगे नियम, जानिए पूरा मामला
बिहार में शराबबंदी सिर्फ़ काग़ज़ों पर ही दिख रही है, ज़मीनी हक़कीत कुछ और ही है। शराबबंदी के बावजूद बिहार में आए दिन अवैध शराब ज़ब्त हो रही है, लेकिन शराब की तस्करी जारी है।
पटना, 19 मार्च 2022। बिहार में शराबबंदी सिर्फ़ काग़ज़ों पर ही दिख रही है, ज़मीनी हक़कीत कुछ और ही है। शराबबंदी के बावजूद बिहार में आए दिन अवैध शराब ज़ब्त हो रही है, लेकिन शराब की तस्करी जारी है। यही वजह है कि अब नीतीश सरकार बिहार में शराबबंदी विधेयक में संशोधन करने जा रही है। अब बिहार में शराब पीने या शराब के नशे में पकड़े जाने पर जुर्माना लगेते हुए छोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही जुर्माना नहीं चुकाने पर एक महीने के लिए जेल की सज़ा होगी। शराबबंदी के लिए बिहार सरकार द्वारा पारित क़ानून में संशोधन की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित मद्यनिषेध और उत्पाद संशोधन विधेयक-2022 में इस मुद्दे पर विचार किया जा रहा है।

शराबबंदी विधेयक में संशोधन
शराबबंदी विधेयक में संशोधन को लेकर विधायकों को मद्यनिषेध और उत्पाद संशोधन विधेयक-2022 की कॉपी दी गई है। ताकि वह शराबबंदी क़ानून के संशोधन से वाकिफ हो सकें। ग़ौरतलब है कि इस सत्र में ही ये विधेयक पास किया जा सकता है। विधेयक के मुताबिक़ शराब पिये हुए व्यक्ति को अगर पुलिस पकड़ती है तो उसे नज़दीकी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। जुर्माना भरने के बाद भी उसे छोड़ा जाएगा या नहीं गिरफ्तार करनेवाले पदाधिकारियों की रिपोर्ट पर फ़ैसला लिया जाएगा। उसे छोड़ने का फ़ैसला पूरी तरह से डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास सुरक्षित रहेगा । आपको बता दें कि शराबबंदी कानून के तहत दर्ज मामले में एएसआई रैंक से नीचे के पुलिस या उत्पाद विभाग के अधिकारी कार्रवाई नहीं कर सकते हैं। वहीं संशोधित विधेयक में ड्रोन से ली गई तस्वीरों को भी सबूत के तौर पर मानने का प्रावधान रखा गया है।

जब्त पदार्थों को नष्ट करने के लिए आदेश की ज़रूरत नहीं
बिहार मद्य निषेध और उत्पाद संशोधन विधेयक- 2022 के मताबिक कार्यपालक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति उच्च न्यायालय की राय शुमारी की जाएगी। न्यायिक मजिस्ट्रेट की गिनती द्वितीय श्रेणी में होगी और वह द्वितीय श्रेणी के मुताबिक ही शक्तियों का प्रयोग कर पाएंगे। बिहार मद्य निषेध उत्पाद अधिनियम 2016 की धारा 81 के बाद नई धारा 81-ए बनाया जाएगा। इस धारा के तहत परिवहन की चुनौतियों की वजह से जब्त चीजें या अवैध शराब को कहीं भी सुरक्षित नहीं रखा जाएगा। सेंपल के तौर पर छोटा सा नमूना रख कर सारे अवैध पदार्थों को मौक़े पर ही नष्ट कर दिया जाएगा। इसके लिए पुलिस पदाधिकारी, उत्पाद पदाधिकारी, विशेष न्यायालय या फिर कलेक्टर के आदेश की ज़रूरत भी नहीं होगी।

राज्य सरकार जारी करेगी दिशा निर्देश
शराबबंदी के लिए पारित क़ानूनो के संशोधित प्रावधान में धारा-35 के अपराधों को छोड़कर बाकि सभी सुनवाई विशेष अदालत में की जाएगी। विशेष अदालत की अध्यक्षता सत्र न्यायाधीश, अपर सत्र न्यायाधीश, सहायक सत्र न्यायाधीश या न्यायिक मजिस्ट्रेट करेंगे। इन मामलों में गिरफ़्तार अपराधी को जेल से रिहा किया जा सकता है अगर वह धारा-37 में मुताबिक कारावास की अवधि पूरी कर चुका हो। हर एक जिला में कम से कम एक विशेष न्यायालय होगा। राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के मशवरे से सेवानिवृत्त न्यायाधीश(अपर सत्र न्यायाधीश) विशेष न्यायालय में पीठासीन होने के लिए नियुक्त किए जा सकेंगे। विशेष अदालत की आरोप पत्र दाखिल करने की तारीख से 1 साल के अंदर ही फ़ैसले को निपटाने की कोशिश करेगी। तलाशी, जब्ती, शराब नष्ट करने के सिलसिले में राज्य सरकार दिशा निर्देश जारी करेगी।
ये भी पढ़ें: जानिए कौन हैं बिहार में जन्मे डॉ. आशीष झा, जिन्हें बाइडेन ने दी अमेरिका में कोविड कंट्रोल की जिम्मेदारी












Click it and Unblock the Notifications