मुजफ्फरपुर के सभी विधानसभा क्षेत्रों में जातिय समीकरण हावी

पटना (मुकुन्द सिहं)। सूबे की राजनीति में जातिवाद किस हद तक समाहित है, इसका बेहतरीन उदाहरण मुजफ्फरपुर जिले के सभी विधानसभा क्षेत्र में हुए अबतक के चुनाव बखूबी प्रस्तुत करते हैं। फिलहाल जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों बोचहां और सकरा को छोड़ दें और अन्य क्षेत्रों में अलग-अलग राजनीतिक जातिगत समीकरण हैं।

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गायघाट विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी के रूप में वीणा देवी ने पिछली बार यानी वर्ष 2010 में विजय हासिल किया था। खास बात यह है कि ये मूल रूप से राजपूत हैं और इन्होंने भूमिहार जाति के दिनेश सिंह से उनकी दूसरी पत्नी के रूप में विवाह किया। इस जातिगत गंठजोड़ के अलावा पिछली बार जदयू के साथ रहने के कारण कुशवाहा समाज व अति पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं का साथ वीणा देवी को मिला था। हालांकि राजद के उम्मीदवार महेश्वर प्रसाद यादव ने उन्हें कड़ी टक्कर दी लेकिन फिर करीब सोलह हजार मतों के अंतर से पराजित हो गये थे। वीणा देवी को कुल 56 हजार 385 मत मिले थे।

वहीं इस बार यह समीकरण बदलने की उम्मीद तेज हो गयी है। वजह यह है कि इस बार जदयू राजद के साथ है। लेकिन पूरे क्षेत्र में अति पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या निर्णायक होने के कारण पेंच फंसने की भी पूरी संभावना है।

वहीं औराई विधानसभा क्षेत्र में भी गायघाट विधानसभा क्षेत्र के जैसे हालात हैं। पिछली बार भाजपा के रामसूरत राय 38 हजार 422 मत लाकर विजयी हुए थे जबकि राजद के उम्मीदवार सुरेंद्र कुमार यादव को केवल 26 हजार 681 मत हासिल हुआ था।

किधर जायेंगे भमिहार

सबसे दिलचस्प यह है यादव बहुल इस विधानसभा क्षेत्र में भूमिहार जाति के रामसूरत राय के विजयी होने की सबसे बड़ी वजह गणेश प्रसाद यादव थे जिन्होंने बतौर जेडीएस उम्मीदवार 13 हजार 504 मत हासिल किया था। हालांकि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में शशि भूषण प्रसाद शाही ने भी 12 हजार 859 मत लाकर भूमिहार-यादव के बीच राजनीतिक संघर्ष को दिलचस्प बनाया था।

जबकि मीनापुर विधानसभा क्षेत्र में लड़ाई दो पिछड़ों के बीच थी। पिछली दफा जदयू उम्मीदवार के रूप में कुशवाहा जाति के दिनेश प्रसाद ने राजद के राजवी कुमार उर्फ मुन्ना यादव को करीब सात हजार मतों के अंतर से हराया। इस क्षेत्र में अति पिछड़ा वर्ग खासकर सहनी समाज की निर्णायक भूमिका का अनुमान इसी मात्र से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में सकल देव सहनी ने 15 हजार 325 मत हासिल किया था। चूंकि इस बार गठबंधन के सारे समीकरण इधर से उधर हो चुके हैं, इसलिए इस बार होने वाले विधानसभा चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होंगे। इसकी चर्चा शहर में जोरों पर है।

नये राजनीतिक गठजोड़ के आसार

वहीं जिले का बरूराज विधानसभा क्षेत्र पिछली दफा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां से राजद को जीत मिली थी। सबसे दिलचस्प यह है कि राजद के उम्मीदवार ब्रज किशोर सिंह जाति के भूमिहार हैं और उनसे हारने वाले जदयू के उम्मीदवार रहे नंद कुमार राय जाति के यादव। श्री सिंह को 42 हजार 783 मत मिले थे जबकि श्री रय को 28 हजार 417 मत। वहीं कांग्रेस के बालदेव महतो ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में सफलता हासिल की थी। 14 हजार 247 मत लाकर वे तीसरे स्थान पर रहे थे।

बहरहाल इन चारों विधानसभा क्षेत्रों में जातिगत समीकरण पिछली बार की तरह परिणाम देंगे या फिर नये राजनीतिक गंठजोड़ का असर मतदाताओं पर पड़ेगा, यह तो आने वाला वक्त बतायेगा। फिलहाल पूरे जिले में जनसमस्याओं को लेकर मतदाताओं की गोलबंदी भी तेज हो गयी है। इसे एंटी इनकंबेंसी फैक्टर कहा जाना अतिश्योक्ति नहीं होगी।

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