बिहार चुनाव: भागलपुर में मुसलमानों के जख्मों को कुरेदेगी भाजपा
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला)। बिहार के भागलपुर में साल 1989 के अक्तूबर महीने में हुए दंगों में मुसलमानों के कत्लेआम को भाजपा आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने जा रही है। भागलपुर शहर और इसके आस-पास दंगों में एक करीब दो हजार मुसलमान मारे गए थे।
वह केन्द्र में राजीव गांधी की सरकार का दौर था। भागलपुर के लोगेन मोहल्ला को पूरी तरह से दंगाइयों ने तबाह कर दिया था। सिर्फ एक मोहल्ले में हुए कत्लेआम में 120 मर्द, औरतें, बच्चे मारे गए थे।
बताएगी मुसलमानों को
सूत्रों का कहना है कि भागलपुर दंगों को उठाकर भाजपा एक तरह से मुसलमानों को साबित करेगी कि तब राज्य तथा केन्द्र में कांग्रेस सरकार थी। उस दंगे के गुनहगारों को कभी सजा नहीं मिली। उस दंगे में आधिकारिरक रूप से 1,891 लोग मारे गए थे।
दोषी कांग्रेस
दंगों की जांच करने वाली एनएन सिंह सरकार ने दंगों को रोक पाने में विफल रहने के लिए कांग्रेस सरकार को दोषी माना था। सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेता अब राज्य के मुसलमानों को बताएंगे उन दंगों की दोषी कांग्रेस के साथ किस तरह से लालू यादव से लेकर नीतीश कुमार हाथ मिला रहे हैं। भागलपुर दंगों के बाद देश की तस्वीर बदली।
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केन्द्र में वी.पी.सिंह की सरकार बनी। उसमें लालू भी थे। उन्होंने 29 दिसंबर, 1989 को लोकसभा में भागलपुर पर बहस के दौरान कांग्रेस सरकार को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने नाम लेकर राजीव गांधी और सोनिया गांधी पर दंगों को रोक पाने में नाकामयाब रहने के आरोप लगाए।
भाजपा के एक नेता ने वन इंडिया को बताया कि भाजपा ने नेता उन दंगों की अखबारों की कतरनों को जनता को दिखाएंगे ताकि साबित कर सकें कि किस तरह से अब कांग्रेस और लालू-नीतीश एक साथ हो गए। यानी ये अवसरवादी हैं।जानकार कहते हैं कि भागलपुर का दंगा 1947 के बाद बिहार का सबसे खौफनाक दंगा था।













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